इस गांव में पहली बार एक नौजवान की लगी सरकारी नौकरी

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चकराताइस गांव में पहली बार एक नौजवान की लगी सरकारी नौकरी: जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर का ऐसा गांव, जहां पहली बार किसी नौजवान की सरकारी नौकरी लगी है। 21 परिवारों वाले इस गांव की आबादी 250 के आसपास है। गांव में तमाम पढ़े-लिखे नौजवान हैं, लेकिन सरकारी चौखट पर दस्तक देने को सौभाग्य पहली बार गजेंद्र को ही मिल पाया। गांव के लिए यह ऐसी अविस्मरणीय घटना है, जिसने पूरे गांव को जश्न में डुबो दिया है। लोग इसे क्षेत्र के इष्ट महासू देवता की कृपा मान रहे हैं और इसके लिए उन्होंने हनोल मंदिर में रात्रि जागरण भी किया।

देहरादून जिले के इस गांव में अर्से बाद ग्रामीणों ने मिलकर जश्न मनाया और इसका निमित्त बना शेर सिंह का पुत्र गजेंद्र। वह गांव का पहला युवक है, जिसका चयन किसी सरकारी सेवा (नेवी) में हुआ है। गांव में दो दर्जन से ज्यादा युवा पढ़े-लिखे हैं और उन्हें जनजातीय क्षेत्र के आरक्षण का लाभ भी मिलता है।

बावजूद इसके आजादी के 70 साल बाद तक गांव का कोई युवा सरकारी नौकरी हासिल नहीं कर पाया। अपने पाल्यों को तमाम प्रयासों के बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिलने से निराश ग्रामीण कुछ समय पूर्व महासू मंदिर हनोल से बोठा महासू व चालदा महासू के देव डोरिए पूजा-अर्चना के लिए गांव में लाए थे। इसलिए गजेंद्र की सफलता को वे महासू देवता की ही कृपा मान रहे हैं।

महासू देवता के देवमाली कुंवर सिंह कहते हैं कि महासू के आगमन के बाद गांव में खुशहाली आई है। स्थानीय ग्रामीण सुंदर सिंह, गुमान सिंह, शमशेर सिंह आदि ने बताया कि गजेंद्र की सरकारी नौकरी लगने पर दो रोज पहले सभी ग्रामीण महासू मंदिर हनोल में मत्था टेकने गए। उन्होंने हनोल मंदिर में रात्रि जागरण कर देवता से आशीष भी लिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी ग्रामीणों पर देवता की कृपा बरसती रहेगी।

 

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