मंत्री प्रसाद नैथानी के गांव में आज भी लोग अंतिम संस्कार से पहले मौत का सामना कर रहे हैं

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उत्तराखंड में नदी को पार करते हुए लोग अपना जीवन व्यापन कर रहे हैं कोई रोजगार की तलाश में रोज खतरो से खेल रहा है तो पहाड़ के बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए बनती नदियों के रास्तों का सहारा ले रहे हैं लेकिन पहाड़ों में जीवन से मरण तक हर हालात में यहां के लोग मौत के रास्ते पर ही चल रहे हैं ऐसी ही एक तस्वीर उत्तराखंड के टिहरी जिले के कोर्ट गांव से आई है जहां पर लोग मृत शरीर के अंतिम संस्कार के लिए खतरनाक नदी के रास्ते का सहारा ले रहे हैं

हैरानी की बात यह है कि इस गांव में आपदा तक तो एक पुल ओर सड़क थी लेकिन उसके बाद पुल है भी या नही कोई आज तक देखने तक नही आया । जबकि यह गांव हरीश रावत और बहुगुणा सरकार में एक मंत्री भी दे चुका है । पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी इसी गांव से ताल्लुक रखते हैं लेकिन मंत्री प्रसाद नैथानी नेवी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते हुए भी इस पुल पर ध्यान देना भी मुनासिब नहीं समझा लिहाजा आज भी कोट और उससे जुड़े हुए गांव के लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करते है आपको बताते चलें कि कुछ दिन पहले ग्राम कोट में ही घास पत्ती लेने गयी

महिलाओं में से एक महिला भी नदी की चपेट में आ गयी थी लेकिन साथ की महिलाओं ने साहस दिखाया और अनहोनी होने से बच गयी  उफनती लहरों में ऐसे लोग रोज इसी तरह से अपने अपने गांव जाने के लिए मजबूर हैं लगभग आधा दर्जन से ज्यादा गांव ऐसे ही रोज नदी को पार कर जरूरी काम निपटाने बाहर जाते हैं । तस्वीरें बता रही है कि किस तरह से एक बुजुर्ग के देहांत के बाद यह लोग नदी पार कर के अंतिम संस्कार के लिए बॉडी को ले जा रहे हैं बकायदा उन्ही में से एक ग्रामीण है यह वीडियो बनाया है ताकि सोई हुई सरकार को यह लोग आईना दिखा सके

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