उत्तराखंड में 6000 से अधिक अतिथि शिक्षकों पर छाया संकट

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देहरादून :उत्तराखंड राज्य के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 6000 से अधिक अतिथि शिक्षक आज से बेरोजगारी की कगार पर आ गए। एक अप्रैल से प्रारंभ हो रहे नए शैक्षिक सत्र के लिए इन शिक्षकों से दोबारा शिक्षण कार्य लिए जाने के बारे में शुक्रवार तक निर्णय नहीं हो सका।

अतिथि शिक्षकों का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की वजह से सरकार और शिक्षा महकमा आगे कोई भी कदम उठाने में हिचकिचा रहे हैं। सरकार की नजरें इस मामले में पांच अप्रैल को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। [ads1][ads1]

राज्य के दूरदराज के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन सुचारू करने के लिए एलटी और प्रवक्ता संवर्ग के रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इन शिक्षकों की अस्थाई रूप से नियुक्ति 31 मार्च, 2017 तक की गई है।

शुक्रवार को इन शिक्षकों का अंतिम कार्यदिवस रहा। गढ़वाल मंडल में तीन हजार से अधिक और कुमाऊं मंडल में 2780 अतिथि शिक्षकों को आगे नियुक्ति मिलेगी या नहीं, इस बारे में सरकार ने कोई फैसला नहीं किया है। हालांकि, राज्य की नई भाजपा सरकार भी अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रखने का भरोसा दे चुकी है।

इसके बावजूद सरकार के लिए इस दिशा में कदम बढ़ाना आसान नहीं है। हाईकोर्ट अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध मानते हुए इन्हें हटाने के आदेश दे चुका है। वहीं सरकार ने हाईकोर्ट में जो जवाब दिया है, उसमें शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कार्यवाही जारी होने की बात कही गई है। ऐसे में सरकार अतिथि शिक्षकों को लेकर उलझन में है। [ads1][ads1]

इस संबंध में बीते रोज विधानसभा स्थित कक्ष में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने, अपर मुख्य सचिव शिक्षा डॉ रणबीर सिंह, महकमे के आला अधिकारियों और अतिथि शिक्षकों के संगठन के साथ बैठक की थी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के मुताबिक सरकार अतिथि शिक्षकों की समस्याओं का जल्द समाधान करेगी।

 

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