दून मेट्रो प्रोजेक्ट के एडिशनल CEO का पद संभालेंगे, अपर सचिव आशीष श्रीवास्तव

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देहरादून:  जितेंद्र त्यागी के इस्तीफे के बाद माना जा रहा था कि दून-हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो रेल प्लान में न सिर्फ देरी होगी बल्कि त्यागी जैसे अनुभवी अफसर का लाभ भी नहीं मिल पाएगा। ये त्यागी का ही प्रस्ताव था कि मेट्रो को दून-हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच ही नहीं बल्कि दून शहर के भीतर भी दौड़ाया जाए। उन्होंने इसके लिए दो रूट प्रस्तावित किए।

एक रूट आइएसबीटी से कंडोली (राजपुर) जबकि दूसरा रूट एफआरआइ (वन अनुसंधान संस्थान) से रायपुर तक बनाया गया। मेट्रो की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में भी दोनों रूट शामिल किए गए। यह उनका ही प्रयास था कि मेट्रो रेल का जो कुल रूट पहले 73 किलोमीटर था, वह बाद में बढ़कर 100 किलोमीटर हो गया।

इस बीच जितेंद्र त्यागी के इस्तीफे से सभी हैरान थे। ये बात सामने आई थी कि जब शासन के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों की उनकी मांग को नजरअंदाज कर दिया था तभी जितेंद्र त्यागी ने इस्तीफे का फैसला लिया था। वो फरवरी 2017 में उत्तराखंड मेट्रो रेल कार्पोरेशन के प्रबंधक बने थे।

त्यागी का कहना था कि राज्य सरकार कैसे मेट्रो का काम करना चाहती है ये उनकी समझ से बाहर है क्योंकि अबतक मेट्रो के नाम पर किसी भी अधिकारी कर्मचारी को रिक्रूटमेंट नहीं किया गया है। उन्होंने बताया था कि अबतक मेट्रो का बहुत सा काम हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हो पाया इसका कारण धीमी गति है। अबतक केंद्र से भी डीपीआर की कोई इजाजत नहीं मिली है। मेट्रो की मीटिंग के लिए उन्हें बुलाया जाता है लेकिन कोई समय से ही नहीं आता है। इतना ही नहीं उनको घंटों इंतजार करवाया जाता है।

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