क्या चुनाव मेनिफेस्टो में किए गए वादे पूरे न करना मतदाताओं के साथ ठगी नहीं है ?

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  • किसी भी चुनाव में राजनैतिक दलों द्वारा चुनावी मेनिफेस्टो बनाया जाता है. मैनिफेस्टो बनाने का एकमात्र उद्देश्य है कि राजनैतिक दल अपने मतदाताओं को यह बतान चाहते हैं कि यदि हम सत्ता को प्राप्त करते हैं, तो सत्ता में आते ही हम मैनिफेस्टो में वर्णित कार्य करेगें या हमारी शासन पध्यति मैनिफेस्टो में वर्णित सिद्धांतों पर आधारित होगी |लेकिन आजकल देखा जाता है कि जनता से वोट प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दल अपना चुनावी मेनिफेस्टो तैयार करते हैं और इन चुनावी मेनिफेस्टो में किए गए वादे सत्ता प्राप्त करने के बाद भूल जाते हैं | क्या किसी राजनीतिक दल द्वारा इस तरह का किया गया कृत्य “ठगी” के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है ?\
  • और अगर आता है तो क्या देश के चुनाव आयोग ने आज तक किसी भी राजनीतिक दल की मान्यता इस आधार पर रद्द की कि सत्ता प्राप्त करने के बाद उस राजनीतिक दल ने अपने चुनावी मेनिफेस्टो के अनुरूप मतदाताओं की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया |
  • क्या राजनीतिक दलों को मतदाताओं को ठगने का कानूनी अधिकार प्राप्त है या राजनीतिक दल कानूनी व्यवस्था से ऊपर चलते हैं | एक प्रश्न यह भी खड़ा होता है कि यदि कोई राजनीतिक दल अपने मेनिफेस्टो के अनुरूप राज्यसत्ता नहीं चलाता तो क्या पूर्ण बहुमत में होने के बाद भी उस राजनीतिक दल को सत्ता से वापस किया जा सकता है और अगर नहीं किया जा सकता है तो इस तरह के मन लुभावने मेनिफेस्टो की उपयोगिता क्या है ?
  • भारत का एक आम नागरिक यदि सरकार को कर देने में चुक जाए या सरकार के मानक के विपरीत जाकर कोई भवन आदि का निर्माण कर ले या सरकारी अधिकारी द्वारा मांगी गई सूचना समय पर उपलब्ध न करा पाये तो उसके लिए विभिन्न कानूनों में बड़ी कठोर सजा की व्यवस्था है |
  • लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी मेनिफेस्टो जारी करने के बाद मेनिफेस्टो की शर्तों को पूरा न किए जाये तो क्या किसी भी राजनीतिक दल को दंडित करने का कोई विधान देश की तथाकथित आजादी के सत्तर साल बाद आज तक संसद या चुनाव आयोग द्वारा बनाया गया है | और यदि नहीं बनाया गया है तो फिर लोकतंत्र में दंड का विधान बस सिर्फ जनता के लिये है | लोकतांत्रिक विधि व्यवस्था में राजनीतिक दलों को इस तरह का अभय दान क्यों प्राप्त है ?
  • मेरा सुझाव है कि झूठ बोलने पर राजनीतिक दलों के विरुद्ध भी दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान होना चाहिए | यही लोकतंत्र की पूर्णता का प्रतीक है और यही राजनीतिक दलों के झूठ से नागरिकों को बचाने का एकमात्र रास्ता है |
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