गांव के देवता की वजह से नगर पालिका में शामिल नहीं होना चाहते ग्रामीण

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उत्तराखंड के गांवों में ग्राम देवता पर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था है। गांव की खुशहाली के लिए ग्रामीण समय-समय पर इनकी पूजा करते हैं। जागर-नृत्य का आयोजन कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है। आपको जानकारी आश्चर्य होगा कि ग्राम देवताओं पर आस्था के चलते उत्तरकाशी के ग्रामीण नगर पालिका में शामिल नहीं होना चाहते हैं। उन्हें डर है कि कहीं पालिका में गांव को शामिल करने से उनकी थात माता विलुप्त हो जाए।

गांव बचाओ आंदोलन के बैनर तले शुक्रवार को भी नगर पालिका बाड़ाहाट विस्तारीकरण के विरोध में कलक्ट्रेट में ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि अगर गांवों को पालिका में शामिल किया जाता है, तो उनकी थात माता भी विलुप्त हो जाएंगी। कहा कि गांव में किसी भी शुभ कार्य तथा अन्य किसी काम के लिए पहले थात माता को पूछा जाता है, लेकिन अगर इन गांवों को पालिका में शामिल करते हैं, तो हमारी पौराणिक धरोहर थात माता विलुप्त हो जाएगी।

वहीं पांचवें दिन धरना-प्रदर्शन करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी सकारात्मक कार्यवाही अभी तक नहीं की गई है। इसको देखते हुए जल्द ही शासन-प्रशासन की बुद्धि-शुद्धि के लिए हरि महाराज, कंडार देवता, खंणद्वारी माता, थात माता की अगुवाई में यज्ञ किया जाएगा। वहीं इन सभी देव-डोलियों से जल्द ही शासन-प्रशासन की बुद्धि शुद्ध होने की कामना की जाएगी। जबकि पांचवें दिन धरना प्रदर्शन में मांडो, तिलोथ तथा डांग के ग्रामीण बैठे। इस मौके पर रमेश चंद्र मिश्रा, विजला गुसांई, बचनी मटूडा, सुनीला, सरिता, जमोत्री, सुमित्रा, नरेश चौहान, सुभाष नौटियाल, ममता मटूडा, रजनी, देवेश्वरी, कुन्नती,सुशीला, पारर्वती,रतना देवी आदि मौजूद रहे।

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