हरिद्वार में लगी बुद्ध पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी, जानिए पूजा की विधि

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हरिद्वार: बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्ध्य देकर सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान लोगों ने दान आदि भी किया।

पुण्य माह बैसाख के अंतिम स्नान पर हरिद्वार के गंगा घाटों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। आस्था है कि पूर्णिमा पर स्नान पूरे बैसाख माह के स्नान के बराबर होता है। प्रत्येक माह की पूर्णिमा तिथि श्रीहरि विष्णु भगवान को समर्पित होती है। शास्त्रों में पूर्णिमा को तीर्थ स्थलों में गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।

शास्त्रों में पूरे बैशाख माह में गंगा स्नान को अधिक फलदायी बताया गया है। क्योंकि बैसाख माह की पूर्णिमा को ही भगवान बुद्ध का जन्म भी हुआ था। इसलिए इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी के चलते श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, राम घाट, बिरला घाट, प्रेमनगर घाट सहित अन्य गंगा घाटों पर सुबह से ही स्नान करना आरंभ कर दिया था।

स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्ध्य देकर घर परिवार में खुशहाली की कामना की। श्रद्धालुओं ने दान में दक्षिणा, वस्त्र व अन्य वस्तुएं भी प्रदान की।

सुबह की गंगा आरती में उमड़ी भीड़

हरकी पैड़ी पर सुबह गंगा आरती में भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह की आरती में सैंकडो श्रद्धालुओं ने गंगा आरती में भाग लेकर माँ गंगा के जयकारे लगाने के साथ ही माँ गंगा की अविरलता, पवित्रता का सकंल्प भी लिया।

मीठा दान से गोदान के बराबर फल

बैशाख मास की पूर्णिमा के दिन बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के पर्व के रूप में मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार गौतम बुद्ध भगवान विष्णु का ही अवतार थे। इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

इस त्यौहार को बहुत ही पवित्र और फलदाई माना गया है। इस दिन कुछ मीठा दान करने से गोदान करने के बराबर फल मिलता है। इसके अलावा अगर आपसे अनजाने में कोई पाप हो गया है तो इस दिन चीनी और तिल का दान देने से इस पाप से छुटकारा मिल जाता है।

ऐसे करें पूजा 

ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शास्त्री ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा पर पूजा करने के लिए सबसे पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी से भरा पात्र रखें। इसके साथ ही तिल और चीनी भी रखें। फिर तिल के तेल से दीपक जलाएं और भगवान की पूजा करें। इस दिन बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है। उसकी शाखाओं को रंगीन पताकाओं और हार से सजाएं।

साथ ही इस वृक्ष की जड़ो में दूध और सुगंधित जल डालें। इस दिन भूलकर भी मांसाहार का सेवन न करें, क्योंकि गौतम बुद्ध पशु हिंसा के विरोधी थे। हिन्दू धर्मावलम्बियों का मानना है कि महात्मा बुद्ध विष्णु भगवान के नौवे अवतार हैं। अत: इस दिन को हिन्दुओं में पवित्र दिन माना जाता है और इसलिए इस दिन विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है। बताया कि पूर्णिमा को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होता है और चन्द्रमा भी अपनी उच्च राशि तुला में होता है।

सुरक्षा है चाकचौबंद 

हरकी पैड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर स्नान के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद है। इस दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किया गए है। जगह जगह तैनात पुलिसकर्मी संदिग्धों पर नजर बनाये हुए हैं।

मां जगदीशिला की डोली ने किया गंगा स्नान

टिहरी गढ़वाल से हरिद्वार पहुंची भगवान विश्वनाथ मां जगदीशिला डोली को श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान कराया। स्नान के बाद यात्रा ऋषिकेश के लिए रवाना हुई। इस यात्रा का समापन गंगा दशहरा के दिन भगवान विश्वनाथ मां जगदीशिला तीर्थ स्थल पर होगा।

टिहरी गढ़वाल के विशोन पर्वत पर स्थित भगवान विश्वनाथ मां जगदीशिला तीर्थ स्थल से प्रतिवर्ष डोली यात्रा का आयोजन पूर्व कैबिनेट मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी के नेतृत्व में वर्ष 2000 से निरंतर होता चला आ रहा है।

इसी श्रृंखला में 18वीं बार मंत्रीप्रसाद नैथानी डोली यात्रा लेकर हरकी पैड़ी हरिद्वार पहुंचे। जहां पर स्थानीय डोली यात्रा के संयोजक भारत माता मन्दिर के श्रीमहंत ललितानंद महाराज,  आमेश शर्मा, पं. जगदीश अत्री, मुकेश शर्मा, अंकुर पालीवाल, हरिओम पटुवर, एडवोकेट वरूनेश सहित तीर्थ पुरोहितों ने पं. श्रीकांत वशिष्ठ के साथ मिलकर डोली यात्रा का भव्य स्वागत किया।

इस मौके पर पूर्व कैबिनेट मंत्रीप्रसाद नैथानी ने कहा कि वर्ष 2000 से प्रारंभ डोली यात्रा का हरिद्वार में आगमन एक परंपरा बन गया है, जो भगवान विश्वनाथ और मां जगदीशिला की कृपा से ही संभव हो पाया है।

यात्रा का उद्देश्य विश्व शांति की कामना, देव संस्कृतियों को जिंदा रखना है। बताया कि शुरू के वर्षों में डोली यात्रा हरिद्वार से विशोन पर्वत टिहरी गढ़वाल तक ही सीमित रहती थी, लेकिन विगत कई वर्षों से इस यात्रा का विस्तार कुमाऊं मंडल में भी हो चुका है।

तिब्बती समुदाय ने की पूजा अर्चना 

नैनीताल में बुद्ध पूर्णिमा पर तिब्बती समुदाय ओर से सुख निवास स्थित बौद्ध मठ में विशेष पूजा अर्चना कर विश्व शांति की कामना की गई। पर्व की वजह से तिब्बती व भोटिया बाजार दोपहर बाद तक बंद रहा।

इस मौके पर मुख्य पुजारी लोपसांग सेरेजा व 11 लामाओं द्वारा ढाई घंटे तक पाठ किया गया। समुदाय के लोगों द्वारा भी सामूहिक पूजा अर्चना की गई। कार्यक्रम में डुंदुप सेरिंग, ईसी थुपतैन,  लोपसांग स्वेपा,  पेंडल,  जिग्मे समेत अन्य थे। इस दौरान दुनियां में शांति के लिए एक हजार दीये जलाए गए। – See more at:

 

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