नेताओं को कह सकेंगे अफसर, हो जाएगा बस लिख कर दे दीजिए सर!

0

प्रदेश में लोकायुक्त का गठन होगा कि नहीं, अभी इस पर सस्पेंस है। लोकायुक्त विधेयक प्रवर समिति के हवाले है और सियासी हलकों में इसके पास होने या न होने को लेकर बहस छिड़ी है। मगर जिस रूप में लोकायुक्त पेश हुआ है, सरकार ने उसे वैसा ही लागू कर दिया तो उस सूरत में हुक्मरानों और राजनेताओं के लिए सरकारी अफसरों और कार्मिकों पर रौब गालिब करना आसान नहीं रहेगा। [ads1][ads1]तब उनके हर हुक्म पर अफ सरों को यह कहने का बहाना होगा कि फाइल पर लिखकर दे दीजिए सर। जानकारों की मानें तो लोकायुक्त लागू होने के बाद लोक सेवकों के लिए नियमों को तोड़ना आसान नहीं रहेगा। बहरहाल, सरकार भी लोकायुक्त के कुछ प्रावधानों को लेकर असहज है।
उसके रक्षात्मक रुख पर कांग्रेस भी निशाने साध रही है। सियासत में सरकार के मंत्रियों पर ये सवाल उठते हैं कि उनका नौकरशाही पर कोई नियंत्रण नहीं है। वो बेलगाम हो गई है। मगर दूसरी ओर नौकरशाही के अपने तर्क हैं। कई बार कतिपय हुक्मरानों और अफसरों की जुगलबंदी भी सवालों में रही है।
मगर काम से काम रखने वाले लोक सेवकों का मानना है कि मजबूत लोकायुक्त आने से हुक्मरानों और अफसरों के मध्य मर्यादा की लक्ष्मण रेखा खिंच जाएगी, जिसे लांघना दोनों के लिए आसान नहीं रहेगा। एक वरिष्ठ नौकरशाह का कहना है कि मंत्री या विधायक जी, यदि फोन पर उन्हें कोई निर्देश देंगे और वह नियमों के अनुरूप नहीं होगा, तो निसंकोच कह सकेंगे, ‘ऊपर लोकायुक्त है सर! लिखकर दे दीजिए।’

Loading...