32 लाख लोगों ने 16 साल में पहाड़ से किया पलायन, अब होगी पहाड़ से पलायन की पड़ताल

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DEHRADUN: सूबे में टीएसआर सरकार ने कामकाज संभालते ही जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए अपने विजन पर काम करना शुरू कर दिया है। लोकायुक्त और ट्रांसफर विधेयक को सदन में पेश करने के बाद सीएम ने अपने किए गए वादों के अनुसार प्रदेश में पलायन को लेकर कमेटी का गठन कर दिया है। जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज करेंगे। कमेटी में सतपाल महाराज के अलावा डॉ। धन सिंह रावत, रेखा आर्य भी हैं।

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शहर की आबादी फ्0.ख्फ् फीसद बड़ी

उत्तराखंड के लिए पलायन एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अब तक प्रदेश में जितनी सरकारें आई उन्होंने पलायन को लेकर चिंता तो जताई पर धरातल पर काम करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई। दरअसल पहाड़ों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के साथ- साथ रोजगार की कमी के चलते साल दर साल गांव के गांव खाली हो रहे हैं। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के अनुसार अब तक उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में ख् लाख 80 हजार म्क्भ् मकानों पर ताले लग चुके हैं। इतना ही नहीं क्म् साल में फ्ख् लाख लोगों ने पहाड़ से अपना घर छोड़ दिया। इधर ख्0क्क् के जनसंख्या के आंकडे़ बताते हैं कि राज्य के करीब क्7 हजार गांवों में से क् हजार से ज्यादा गांव खाली हो चुके हैं, ब्00 गांवों में से दस से कम की आबादी रह गई है। इसके साथ ही शहर की आबादी फ्0.ख्फ् फीसद बड़ी है।

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योगी के गांव में भी पलायन जारी

आदित्यनाथ योगी के यूपी की कमान संभालते ही पौड़ी जिले का पंचुर गांव सबकी नजरों में आ गया। सात गांवों वाली उनकी ग्राम पंचायत सीला से अब तक म्ख् परिवार पलायन कर चुके हैं। इनमें योगी के गांव के सात परिवार भी शामिल हैं। पलायन की मुख्य वजह मूलभूत सुविधाओं के साथ ही शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों का अभाव है। गांवों में क्म् साल बाद भी सड़क नहीं बन पाई है। सीला ग्राम पंचायत के सभी गांवों में क्भ्भ् परिवार निवास कर रहे थे। पलायन के बाद अब इनकी संख्या घटकर 9फ् पर आ गई है.

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