उत्तराखंड का हुनर : देहरादून में जुटने लगा है पूरा देश, एक लड़की के हाथों में ऐसा गजब का हुनर है !

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देहरादून का मोथरोवाला। पहले इस जगह में उतनी-चहल पहल नहीं रहती थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस जगह में लोगों की तादात बढ़ती जा रही है। देखा जा रहा है कि यहां देशभर से लोग आ रहे हैं। भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है। लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया है कि देहरादून को मोथरोवाला सभी का फेवरेट बन गया है ?दरअसल यहां वो लड़की रहती है, जिसने कुछ दिन पहले ही एक चमत्कार किया था। हम बात कर रहे हैं दिव्या रावत की। दिव्या ने कुछ दिनों पहले ही कीड़ाजड़ी जैसे अमूल्य औषधि अपनी लैब में ही उगा दी थी। ऐसा करने वाली वो देश की पहली महिला ग्रोवर हैं। दिव्या के इस कारनामे के बाद से देशभर से लोग ये देखने आ रहे हैं कि आखिर इस लड़की के हाथओं में ऐसा किस तरह का हुनर है कि इसने कीड़ाजड़ी को लैब में ही उगा दिया। देश के कोने-कोने से लगातार लोग आते जा रहे हैं और साथ ही दिव्या को बधाई दे रहे हैं।

इसके बारे में दिव्या ने अपने फेसबुक पेज पर भी जानकारी दी है। दिव्या का कहना है कि पूरे भआरत से लोग आकर उनसे कीड़ाजड़ी के बारे में पूछ रहे हैं। दिव्या रावत ने वो कर दिखाया है, जिसे पूरे भारत में अब तक कोई नहीं कर पाया है। प्राकृतिक रूप से पाई जानी वाली कीड़ाजड़ी को दिव्या रावत ने जब अपनी लैब में उगाया तो दुनिया हैरान हो गई। मशरूम की ये खास प्रजाति कॉर्डिसेप्स मिलिटरीज यानी कीड़ाजड़ी कहलाती है। कॉर्डिसेप्स मिलिटरीज को विदेशों में कॉर्डिसेप्स साइनेसिस के विकल्प के तौर में लैब में तैयार किया जाता है। बटन, मिल्की मशरूम और ओएस्टर की कई प्रजातियों के उत्पादन के बाद दिव्या ने कीड़ाजड़ी लैब में उगाने के बारे में सोचा था। ये दिव्या का ही जुनून था कि उन्होंने विदेशों में जाकर कीड़ाजड़ी की तकनीकि को सीखा था। वियतनाम,थाइलैंड और चीन जैसे मुल्कों में कीडाजड़ी का लैब में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। कुल मिलाकर कहें तो जिस काम के होने की उम्मीद सबसे कम थी, वो काम दिव्या ने अपनी लैब में कर दिखाया। अब जरा ये भी जान लीजिए कि आखिर कीड़ाजड़ी क्यों खास कही जाती है।

इसमें पेपटाइड्स, प्रोटीन, विटामिन बी-1, अमीनो एसिड, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। ये एक प्राकृतिक स्टीरॉइड है। एथलीट्स भी इसका सेवन करते हैं। चीन में परंपरागत चिकित्सा पद्धति में इसका इस्तेमाल किया जाता है। फेफड़ों और किडनी के लिए इसे जीवन रक्षक माना जाता है। उत्तराखंड में चमोली और पिथौरागढ़ के धारचूला में कीड़ाजड़ी प्राकृतिक रूप से 3500 मीटर ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाती है। कुल मिलाकर कहें तो ये एक तरह का जंगली मशरूम है, जो एक खास कीड़े की इल्लियों को मारकर उस पर पनपता है। मई से जुलाई के बीच में इसके पनपने का वक्त शुरू होता है। बर्फ पिघलने के साथ ही ये पनपती है। खैर इतना जरूर है कि इस खास जड़ी को दिव्या ने अपनी लैब में ही तैयार कर दिया है। ऐसा करने वाली देश की पहली महिला ग्रोवर का काम देखने कुछ दिनों पहले खुद पूर्व सीएम हरीश रावत पहुचे और दिव्या को बधाई भी दी। उम्मीद है कि आगे चलकर दिव्या और भी लगन से इस काम को अंजाम देंगी।

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