दून की इमरजेंसी में ‘आपात’ स्थिति

0

देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल में जरूरत के मुताबिक इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर (ईएमओ) तक नहीं हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। आपातकालीन सेवा 24 घटे चलती है, लेकिन अस्पताल में केवल चार ही ईएमओ हैं। इन विशेषज्ञों के अभाव में अन्य डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ रही है, लेकिन वह भी इमरजेंसी ड्यूटी से आनाकानी कर रहे हैं। जिससे इमरजेंसी में ‘आपात’ स्थिति बन गई है।

[ads1]
करीब एक साल पहले दून अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में तब्दील कर दिया गया था। अस्पताल में ईएमओ के पांच पद थे, जबकि मेडिकल कॉलेज में कैजुअल्टी मेडिकल अफसर (सीएओ) के भी चार पद हैं, लेकिन इसके सापेक्ष चार ही चिकित्सक तैनात हैं। अस्पताल प्रशासन इस संकट से उबरने के लिए अन्य डॉक्टरों की आपातकालीन ड्यूटी लगाता है। हद यह कि इस संकटकाल में भी कुछ डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी को ना करने लगे हैं। बता दें कि इमरजेंसी तीन पालियों में चलती है और इस दौरान 450 से 500 रोगी यहा उपचार लेते हैं। ऐसे में ईएमओ की रोटेशन में ड्यूटी लगाई जाती है। जिसकी रात्रि शिफ्ट होती है उसे अगले दिन छुट्टी दी जाती है। ऐसे में अन्य चिकित्सकों से इमरजेंसी ड्यूटी कराने के अलावा कोई चारा भी नहीं है।[ads1]
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा का कहना है कि डॉक्टरों का आपातकालीन ड्यूटी से इन्कार करना सही नहीं है। कुछ डॉक्टर इसे लेकर अधिक मुखर हो रहे हैं। इमरजेंसी अस्पताल का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसे में किसी भी तरह की नाफरमानी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उच्चाधिकारियोंको इस संबंध में जानकारी दे दी गई है। इमरजेंसी ड्यूटी से किसी को भी छूट नहीं दी जा सकती।

Loading...