रास न आया रिश्ता तो युवक ने खेला खूनी खेल

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दोनों के बीच कई महीनों से प्रेम संबंध थे लेकिन प्रेमिका के पिता को शादी से एेतराज था। बात इतनी बढ़ गई कि प्रेमी के दिल में जगी नफरत ने एक झटके में सब कुछ खत्म कर दिया। लखना कस्बे में प्रेमिका को गोली मारकर खुद मौत को गले लगाने वाले युवक और युवती के बीच ढाई साल पहले प्रेम पनपा था। दोनों ने आर्य समाज मंदिर में गुपचुप शादी भी की थी। वे दोनों कस्बे के ही एक महाविद्यालय में पढ़ते थे। यही नहीं जब युवती के पिता को आर्य समाज रीति से शादी की बात पता चली तो उन्होंने बेटी की शादी तय कर दी। कुछ दिन पहले जब लड़के वाले गोदभारी करने आए तो प्रेमी ने आकर अपनी शादी का प्रमाण पत्र दिखाया। लड़के वाले गोदभराई किए बगैर लौट गए।

 ढाई वर्ष से चल रहा था प्रेम प्रसंग

एसओ बकेवर आलोक राय ने बताया कि लखना कस्बे के इन्द्रा कॉलोनी निवासी सेवानिवृत फौजी योगेन्द्र के पुत्र राहुल व पुरावली दरवाजा मोहाल निवासी नरेन्द्र सिंह की पुत्री आकांक्षा के बीच तकरीबन ढाई वर्ष से परस्पर प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के बीच यह प्रेम प्रसंग तब पनपा जब दोनों ही कस्बे के महाविद्यालय में पढ़ रहे थे। आकांक्षा बीएड कर रही थी और राहुल बीए में पढ़ रहा था। अपनी उम्र से तकरीबन तीन वर्ष बड़ी आकांक्षा से प्रेम कर दोनों ने साथ जीने मरने की कसम भी खाई थी।

दोनों को पता था कि सजातीय होने के बावजूद समगोत्रीय होने के कारण दोनों के माता-पिता को उनका रिश्ता स्वीकार नहीं था। दोनों ने चोरी छिपे इटावा पहुंच कर 11 मई 2017 को आर्यसमाज मंदिर में जाकर शादी भी कर ली। आर्य समाज मंदिर में शादी करने की भनक आकांक्षा के पिता को लगी तो उन्होंने अपनी पुत्री के साथ कड़ाई से पेश आने और उसकी निगरानी का काम शुरू करने के साथ जल्दी से शादी भी पक्की कर दी। प्रेमिका की शादी पक्की होने की खबर जब भाई राहुल को लगी तो उसने शादी रुकवाने के लिए उसने पुलिस प्रशासन को भी लिखित प्रार्थना पत्र दिया था।

रिवॉल्वर से बुझ गए दोनों चिराग

युवती का पिता नरेंद्र सिंह चौहान
कुछ दिन पहले जब आकांक्षा की गोद भरने के लिए उसके घर मेहमान आए तो राहुल आकांक्षा के घर जा धमका और उसने शादी के लिए मेहमानों के सामने ही अपने प्रेम प्रसंग की कहानी बखान करने के साथ आर्य समाज के कागज भी उन लोगों को दिखा दिए। जिस पर गोद भरने आए मेहमान बगैर गोद भरे ही चले गए। जिसकी शिकायत जब नरेंद्र सिंह ने उसके घर पर की तो राहुल बौखला गया। उसने इसी बौखलाहट में इस घटना को अंजाम दे दिया । नरेंद्र सिंह चौहान मूलत: इकनौर गांव के रहने वाले है। दो दशक पहले सेना से रिटायर्ड होकर लखना कस्बा के पुरावली दरवाजा में रहने लगे थे। वही योगेंद्र सिंह चौहान भी रिटायर्ड फौजी हैं। चकरनगर के कुंदोल गांव के रहने वाले हैं। लखना आकर टॉकीज के पास मकान बनवाकर कई साल से रह रहे हैं।
अजीब संयोग है कि जिस रिवॉल्वर को अपने परिवार की जानमाल की सुरक्षा के लिए खरीदा था। उसी रिवाल्वर ने घर के दोनों चिराग बुझा दिए। पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर से कुछ साल पहले एक पुत्र की मौत हुई थी। उसी रिवॉल्वर से दूसरे पुत्र की भी जान चली गई। कस्बा लखना में प्रेमिका को व उसके पिता को गोली मार कर खुद को भी गोली से उड़ाकर मौत को गले लगाने की घटना को अंजाम देने वाले युवक राहुल के पिता योगेंद्र सिंह चौहान भी रिटायर्ड फौजी हैं। उनके दो बेटे थे। उनके पास एक लाइसेंसी रिवॉल्वर है। वही रिवॉल्वर लेकर राहुल प्रेमिका को गोली मारने आया था। पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर से ही राहुल ने खुद को भी गोली मार ली थी। करीब चार-पांच वर्ष पूर्व रिवाल्वर से मध्यप्रदेश के भिंड में योगेंद्र सिंह शादी में हर्ष फायरिंग कर रहे थे। उसी समय उनके छोटे बेटे को गोली लग गई थी। जिससे उसकी मौत हो गई थी।

दोनों घरों में छाया मातम

कस्बा में प्रेमी के युवती व उसके पिता के गोली मारकर अपने को मौत के मुंह में धकेलने के बाद दोनों घरों में मातम छाया गया। इधर, युवती के पिता अस्पताल में भर्ती हैं। उधर, राहुल उनके घर पहुंचकर आकांक्षा को गोली मारने के बाद अपने को भी गोली मार लेता है। फौजी नरेन्द्र सिंह का पुत्र शैलेन्द्र सिंह उर्फ पिन्टू अगर घर पर होता तो वह भी हादसे का शिकार हो सकता था। पिता के गोली लगने के बाद वह सूचना मिलते ही पुलिस चौकी के रास्ते से निकल आया था। वह भी घर का इकलौता पुत्र था। वहीं मृतक पुत्री भी इकलौती थी। उधर, पुलिस ने मामले में मृतक युवक राहुल के पिता वाईवी सिंह को पूछताछ के लिए पुुलिस ने थाने में बैठा रखा है। पुलिस ने लाइसेंसी रिवाल्वर को बरामद कर सील कर दिया है।

पड़ोस की महिलाएं जब नरेंद्र सिंह के घर पहुंची तब घटना की जानकारी हो सकी। इस घटना की जानकारी जब नरेंद्र सिंह के घर वालों को हुई तो घर में मौजूद नरेंद्र सिंह का पुत्र शैलेन्द्र तुरंत घर से बाजार भागा। इतने में ही उधर से आरोपी युवक स्कूटर से नरेंद्र के घर आ गया। घर का दरवाजा खुला था। नरेंद्र के घर पहुंच कर मेन गेट के दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया था। गोली मारने की घटना किसी पड़ोसी या बाहरी नहीं समझ सका। पड़ोस के लोगों को नरेंद्र चौहान को गोली मारने की जानकारी हुई तो कुछ महिलाएं नरेन्द्र सिंह के घर पहुंची। दरवाजा बाहर से बंद था। महिलाओं ने दरवाजा खुलावने के लिए आवाज दी तो नरेंद्र सिंह की पत्नी जो घायल थीं। किसी तरह उन्होंने छत से जाकर बाहर देखा फिर दरवाजा खोला। दरवाजा खुलने के बाद पड़ोस की महिलाएं नरेंद्र के घर में जाकर देखा तो दोनों खून से लथपथ पड़े थे।

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