घनसाली विधानसभा आस्था का प्रतीक जहां चुनाव से पहले नेताओं ने लगाए थे जमावड़े

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 घनसाली: घनसाली विधानसभा के भिलंगना ब्लॉक में सुदूर क्षेत्र के नोजुला हिंदाव छेत्र सहित पूरे प्रदेश ही नही बल्कि देश के कोने कोने में बसे हिंदाव वासियों की आस्था की प्रतीक मां जगदी शिला के दर्शनों हेतु लोग अपार संख्या में हर साल दिसंबर के अंतिम दिनों में माँ जगदी के स्थान अंथवाल गांव और जगदी शिला पहुंचकर माँ के दर्शन करते है उस समय का मनमोहक और आनंदित दृश्य सभी के मन और दिलों को अवलोकित करता है मान्यता के अनुसार माँ जगदी का पहले दिन अंथवाल गांव में ही दर्शन अपने मायके में ही अवतरित होकर लोगों को दर्शन देती है और फिर उसी दिन शाम को हिंदाव छेत्र के नो गांव का भृमण कर विश्वनाथ जगदिशिला पहुंचती है

जहाँ पर अगले दिन सैकड़ों लोगों की तादाद माँ के दर्शनों हेतु रात भर से पहुंचना शुरू कर देती है और अगले दिन माँ के वापसी तक लोग माँ की डोली के दर्शन करते है लेकिन बदलते परिवेश नेहा जब आया था सिर्फ चंद ही लोगों तक सीमित रह गई है क्योंकि सबसे बड़ा कारण पलायन इस यात्रा पर हावी हुआ है आलम यह है कि जहां कैसा पहले हजारों की तादाद में लोग इस यात्रा में मां के दर्शन हेतु आते थे वहीं अब धीरे-धीरे या संख्या घट रही है इसका परम कारण यह भी है कि छेत्र में अधूरी विकास कार्य सहित खस्ताहाल सड़क मार्ग व पर्यटन के लिहाज से सही काम न होना है लंबे समय से लोगों की जगदिशिला तक सड़क मार्ग पहुंचाने की मांग आज भी अधूरी है

हालांकि पीछले चुनाव ईश्वर के दौरान खुद तत्कालीन मुख्य-मंत्री हरीश रावत भी जगदी शिला में गए थे जहाँ पर मुख्यमंत्री द्वारा कई घोषणाएं भी कर दी गई थी लेकिन वर्तमान में हालात आज भी वही के वही है क्योंकि या घोषणाएं ऐसे समय में हुई थी जब सरकार के आखिरी दिन थे उसमें क्षेत्र के तत्कालीन विधायक भीम लाल आर्य सहित जन प्रतिनिधि शक्ति लाल शाह धनीलाल शाह शूरवीर लाल शाह भी मौजूद थे क्योंकि आने वाला वक्त विधानसभा चुनाव का था लिहाजा मुख्यमंत्री और जनप्रतिनिधियों द्वारा घोषणाये और चुनावी माहौल बनाकर जनता का विश्वास जितना था खैर चुनाव हुए सत्ता परिवर्तन हुई बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई और घनसाली विधानसभा से प्रचंड जीत हासिल कर हिंदाव छेत्र के ही रहने वाले विधायक शक्ति लाल शाह विधानसभा पहुंचे तो हिंदाव छेत्र की जनता को भी एक बार फिर से छेत्र के विकाश की आस जगी लेकिन आज तकरीबन 9 माह बीत जाने पर भी छेत्र अपनी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहा है आलम यह है कि घनसाली अखोडी सड़क हो या फिर जगदिशिला विश्वनाथ को पर्यटन से जोड़ने की बात या फिर छेत्र के कई गांव में विधुत आपूर्ति की बात सिर्फ विवादों और कागजों में ही रह गई है.

 जितेन्द्र राणा, घनसाली

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