जनता से सीधा संवाद करने की कड़ी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिह रावत ने शुक्रवार को ‘देवभूमि डायलॉग’ की शुरुआत की

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देहरादून: जनता से सीधा संवाद करने के कड़ी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिह रावत ने शुक्रवार को ‘देवभूमि डायलॉग’ की शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वरोजगार की दिशा में पहल करने वाली युवा प्रतिभाओं के साथ ही राज्य के तमाम हिस्सों से आए युवाओं से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के बीच से आए महत्वपूर्ण सुझावों को कानून व नियमों के दायरे में लाया जाएगा। ‘रोजगार नहीं, स्वरोजगार’ पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों के जरिये न सिर्फ बेरोजगारी दूर होगी, बल्कि उत्तराखंड को सरसब्ज बनाया जा सकता है। इसके लिए युवाशक्ति और सरकार दोनों को मिलकर कदम बढ़ाने होंगे।

मुख्यमंत्री आवास के सभागार में आयोजित देवभूमि डायलॉग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि युवा प्रतिभाओं की ओर से आया रोजगार नहीं स्वरोजगार का सुझाव वक्त की आवाज है। देशभर में वर्तमान में केवल पौने तीन करोड़ सरकारी मुलाजिम हैं। ऐसे में नौकरी कितनों को दी जा सकती है, अंदाजा लगाया जा सकता है। लिहाजा, स्वरोजगार विकल्प है और इसके जरिए अन्य को भी रोजगार दिया जा सकता है। इससे पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में 10-12 साल में स्वरोजगार के जरिये बेरोजगारी समाप्त करने की ताकत है। बशर्ते, इसे पहचानने वाली आंखें हों। इसमें सरकार हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के लिहाज से न्याय पंचायत स्तर पर विकसित होने वाले ग्रोथ सेंटरों का भी जिक्र किया और कहा कि युवाओं को वहां भी उद्यम स्थापित करने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार का खास फोकस है। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं।उन्होंने भ्रष्टाचार से जंग लड़ने को आगे आने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे युवा प्रतिभाओं के साथ ही मुख्यमंत्री से अपने अनुभव साझा किए। साथ ही कई सुझाव भी दिए। इस अवसर पर 19 युवाओं को चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्ड से नवाजा गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने रंगारंग प्रस्तुतियां भी दीं। इससे पहले मुख्यमंत्री ने देवभूमि डायलॉग का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट, पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी, हार्क के संस्थापक महेंद्र कुंवर, पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी समेत अन्य विशेषज्ञ, विभागीय अधिकारी और युवा मौजूद थे।

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