CM त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुके को बनाया रोजगार का जरिया, बदली नारी निकेतन की तस्वीर

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  • क्या फूलो के बुके को रिसाइकिल कर पर्यावरण संरक्षण का कदम उठाया जा सकता है?
  • क्या पुराने हो चुके बुके से किसी को रोजगार दिलाया जा सकता है ?
    इस पहल को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सार्थक करके दिखाया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने फुलों के बुके को भी पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन का जरिया बना दिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने पुराने हो रहे बुके का सदुपयोग करके एक नई मिसाल पेश की है।

    मुलाकात के दौरान द्वारा बुके देकर अभिवादन, एक सामान्य शिष्टाचार बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बुके की जगह बुक देने का रिवाज प्रचलित किया है। जिसके बाद से मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र अब किताब भेंट कर ही अभिवादन करते है, हालांकि मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री से मिलने वाली अधिकांश लोग अब भी बुके भेंट करते है। इसके उचित उपयोग की चिंता मुख्यमंत्री को रहती है।
    मुख्यमंत्री को जितने भी बुके दिए जाते हैं, पुराने होने पर उन्हें कूडे के ढेर में फेंकने के बजाय पुराने बुके को देहरादून स्थित नारी निकेतन को सौंप दिया जाता है। नारी निकेतन में रह रही संवासिनियां इन बुके का सदुपयोग करती हैं और इन्हें रिसाइकिल कर अगरबत्ती और धूप बनाने के काम में प्रयोग करती है। इस तरह एक बुके का न सिर्फ सदुपयोग होता है बल्कि इसके द्वारा सूक्ष्म रोजगार का सृजन भी होता है।
    मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र की इस पहल से नारी निकेतन की तस्वीर बदलती दिख रही है। जिला प्रोबेशन अधिकारी(डी.पी.ओ.) सुश्री मीना बिष्ट ने मुख्यमंत्री की इस पहल का धन्यवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें भेंट किये जाने वाले बुके, नारी निकेतन को देने व रिसाइकिल करने का यह कदम उठाया है। इस पहल से वहां रह रही संवासिनियों का न सिर्फ मनोबल बढ़ा है, बल्कि धूप और अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल भी आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इस अभिनव पहल से महिलाएं कम लागत पर अगरबत्ती व धूप निर्माण कर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकती है।
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