चारधाम यात्रा 2020: आज ब्रह्ममुहूर्त में खुले बदरीनाथ धाम के कपाट

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बदरीनाथ धाम के कपाट आज शुक्रवार को तड़के चार बजकर 30 मिनट पर खोल दिए गए। इस मौके पर बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी, धर्माधिकारी, अपर धर्माधिकारी व अन्य पूजा स्थलों से जुड़े 28 लोग ही शामिल हुए। कोरोना लॉकडाउन की वजह से इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब कपाट खुलते वक्त धाम में श्रद्धालु मौजूद नहीं थे।

इससे पहले बृहस्पतिवार को योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर से कुबेर जी, उद्धव जी, गरुड़ जी, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा के साथ बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी बदरीनाथ धाम पहुंचे।
योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में कुबेर जी, उद्धव जी और गरुड़ जी की विशेष पूजाएं हुईं। हक-हकूकधारियों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भगवान को पुष्प अर्पित किए। भक्तों ने भगवान बदरीनाथ से कोरोना संकट से निजात दिलाने की कामना की।

बृहस्पतिवार सुबह पांडुकेश्वर से डोली यात्रा बदरीनाथ के रावल के साथ बदरीनाथ धाम के लिए निकली तो पुलिस ने पांडुकेश्वर में ही यात्रा को रोक दिया। सभी के पास चेक किए गए। जो बिना पास थे, उनको लौटा दिया गया। लोगों ने डोली को रोकने का विरोध किया। उनका कहना था कि डोली को इस तरह रोकना अशुभ माना जाता है।

10 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया

बदरीनाथ धाम को 10 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया है। पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश की ओर से मंदिर को सजाया गया। बदरीनाथ सिंह द्वार, मंदिर परिसर, परिक्रमा स्थल, तप्त कुंड के साथ ही विभिन्न स्थानों को लगातार सैनिटाइज किया जा रहा है।

सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना होगा अनिवार्य

जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि धाम परिसर में सामाजिक दूरी का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को मास्क पहनना जरुरी होगा।

निर्देश जारी किए गए हैं कि लॉकडाउन की अवधि तक धाम में पहुंचे पुजारियों को बिना प्रशासन की अनुमति के बदरीनाथ क्षेत्र से अन्यत्र जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे पहले निर्धारित तिथि पर केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं।

बदरीनाथ के इतिहास में पहली बार बदली कपाट खुलने की तिथि

बदरीनाथ धाम के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब धाम में वेद मंत्रों और जय बद्रीनाथ का जयघोष तो सुनाई दिया, पर भक्तों का हुजूम नहीं रहा। धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि यह धाम के इतिहास में पहली बार हुआ, जब धाम के कपाट खुलने पर भक्तों की मौजूदगी नहीं रही।

चमोली नेहरु युवा केंद्र के जिला समन्वयक डा. योगेश धस्माना ने बताया कि वर्ष 1920 में स्वामी विवेकानंद सरस्वती हैजा रोग फैलने के कारण बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर नहीं जा पाए थे और कर्णप्रयाग से ही लौट गए थे।

लेकिन तब यह संकट की स्थिति यात्रा के मध्य में आई थी।  पूर्व में धाम के कपाट खोलने की तिथि 30 अप्रैल तय हुई थी। लेकिन कोरोना संकट के कारण कपाट खोलने की तिथि 15 मई तय की गई ।

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