कैबिनेट: हर विधायक के वेतन से कटेंगे 57,600 रुपये

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कोरोना फंड के लिए विधायकों के वेतन-भत्तों में कटौती में एकरूपता लाने के लिए सरकार अध्यादेश ला रही है। गुरुवार को कैबिनेट बैठक में अध्यादेश लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब सभी विधायकों के मूल वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता,सचिवीय भत्ते में भी तीस प्रतिशत की कटौती की जाएगी। यह व्यवस्था एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक लागू रहेगी।

सरकारी प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि राज्य विधानसभा सदस्यों की पेंशन, वेतन एवं उपलब्धियों से संबंधित अध्यादेश में नया संशोधन किया गया है। कहा कि कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए कैबिनेट ने विधायकों के वेतन-भत्तों से कटौती करने का निर्णय किया था। लेकिन कुछ भ्रम की स्थिति की वजह से कुछ विधायक सभी तीनों मदों से कटौतियां करा रहे थे। जबकि कुछ एक या दो मदों में ही। इस भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए यह अध्यादेश लाया जा रहा है।

भाजपा के विधायक ही करा रहे थे कम कटौतियां
वेतन-भत्तों में कटौतियां में विसंगति सरकार और भाजपा के लिए शर्मिंदगी की वजह भी बनी हुई थी। दरअसल, कांग्रेस के सभी 11 विधायक अपने सभी वेतन-भत्तों से 30 प्रतिशत की कटौतियां करवा कर कोरोना फंड के लिए दे रहे थे। जबकि भाजपा के केवल 13 विधायक ही कांग्रेस के समान 57 हजार रुपये से ज्यादा की कटौती करा रहे हैं।

मंत्रियों को छोड़कर बाकी सभी भाजपा विधायक अपने वेतन-भत्तों से महज नौ हजार से 30 हजार रुपये दे रहे हैं। सूचना के अधिकार के तहत यह मामला सामने आया। केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने इन कटौतियों के आधार पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार सरकार की खिंचाई कर रही है।

विस अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के लिए लेंगे न्याय की राय
विधायकों के वेतन-भत्तों में कटौती का अध्यादेश विस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर लागू हो या नहीं? सरकार इस मुद्दे पर अभी उलझन में हैं। सरकारी प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि इस विषय का अध्ययन किया जा रहा है। न्याय विभाग की राय ली जा रही है। जरूरत पड़ी तो विस अध्यक्ष जी से भी इस बारे में चर्चा की जाएगी और एक समान कटौतियां की व्यवस्था की जाएगी।

सरकार ने यह अच्छा कदम उठाया। सभी विधायकों के वेतन-भत्तों से एक समान कटौती ही होनी चाहिए। अब विसंगति नहीं रहेगी।
प्रीतम पंवार, निर्दलीय विधायक, धनोल्टी

अध्यादेश लाने की जरूरत ही क्या थी? नेता सदन की अपील ही काफी होती। सत्ता के पक्ष के विधायक ही सरकार की बात नहीं सुन रहे थे। यदि अब भी मानेंगे तो क्या संविधान में संशोधन करेगी?
मनोज रावत, कांग्रेस विधायक- केदारनाथ 

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