बरखा अर घस्यारी हे

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बरखा अर घस्यारी हे

बरखा घडेक थमि जा दूं

ल्योंण दी मीते घास की भारी

भेंसी रमाणी गोडी अडाडी

कनके जांण मिन फुगड्यों की सारी

 

हे घस्यारी मिन बि करण क्या

बस्ग्याल लग्यूं च

बरखा बरखणु काम च म्येर

यू त ऋतुवों कु चक्र बण्यू च

दया न धरम हे द्यो त्येरा घर मा

मी छौं एक घस्यारी

पात पन्धैर ल्योण मिन बि

मी छौं पहाड कि नारी

जाणदू छौं मी कस्ट बि त्येरा

पर करि मी कुछ नी सकदू

मैकतें आज्ञा घाम बरखा कि

आज्ञा टालि नि सकदु

 

यकतार त्येरी धार लगाई

रात से दिन ह्वै गाई

खाणी स्येणी हराम हमारी

कन त्वैन बरखा मिस्याई

 

धैर्य धर है किसाण घस्येरी

घडैक मा बिदु ह्वै जालू

चाल चक्र यू रिंगदा रिंगदी

अफरी थाह पर आळू

लेखक: मधुरवादिनी तिवारी

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