प्रदेशभर में प्रसिद्ध “जोशीमठ” के सेब इस बार ग्राहकों को उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाएंगे

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जोशीमठ: प्रदेशभर में प्रसिद्ध “जोशीमठ” के सेब इस बार ग्राहकों को उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाएंगे! पिछले वर्ष की तुलना में इस साल सेब का उत्पादन 40 से 50 प्रतिशत कम हुआ है, पिछले साल अकेले जोशीमठ के किसानों ने 30 मीट्रिक तन सेब का उत्पादन किया था जो इस साल बहुत कम है. जोशीमठ की उर्गम घाटी,सलूड-डुंग्रा, तपोवन घाटी के गांव मेरग, बडागांव, ढाक, रिंगी और नीती घाटी के जेलम, नीति में भी इस बार सेब की फसल बहुत कम है. इसलिए इन क्षेत्रों के सेब का उत्पादन करने वाले किसानों के चेहरे पर मायूसी छायी हुयी है. इस बार क्षेत्र में बेमौसमी वर्षा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि से सेब की फसल को भरी नुकसान हुआ है. जलवायु परिवर्तन और जोशीमठ के निचले इलाकों में तापमान में वृद्धि से सेब के पौधों और बड़े पेड़ों का तो नामो-निशान तो मिट ही गया है लेकिन ऊँचे इलाकों में भी इस वर्ष सेब की फसल चौपट हो गयी है. क्षेत्र में सेब के साथ ही अन्य फलों का भी यही हाल है. देखना है इन किसानों के लिए सम्बंधित विभागीय स्तर पर क्या मदद मिलती है!!!!!!
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