राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड में चोर सिपाही का खेल खेला जा रहा है।

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सत्ता में बैठी त्रिवेन्द्र सरकार के लिए फ्री हैंड चलना आसान नहीं लग रहा है। एक तो दिल्ली की माॅनीटरिंग और उपर से हर महीने आरएसएस त्रिवेन्द्र सरकार कामकाज का अलग से आंकलन कर रहा है। पांच महीने में आरएसएस त्रिवेन्द्र सरकार से दो मर्तबा रिपोर्ट ले चुका है। इसको लेकर विपक्ष ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। बुधवार को हुई सरकार और आरएसएस के बीच मैराथन बैठक के बाद त्रिवेन्द्र सरकार विपक्ष के सवालों के घेरे में फंस गई है। प्रदेश सरकार के कामकाज की आरएसएस द्वारा समीक्षा किए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक संकट करार दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गैर राजनीतिक दल किस आधार पर संवैधानिक तौर पर चुनी गई सरकार की समीक्षा कर रहा है। हालांकि इस पूरे मामले में सरकार ने अपनी सफाई दी है। सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिश ने कहा कि आरएसएस सरकार के कामकाज की समीक्षा नहीं कर रहा। आरएसएस समय-समय पर सरकार को मार्गदर्शन देने का काम कर रहा है। देश को आगे कैसे बढ़ाया जाए इसके लिए आरएसएस मार्गदर्शक के रूप में काम कर रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आरएसएस सरकार के कामकाज का आंकलन और समीक्षा नहीं कर रहा है। आरएसएस चाहे मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा हो या फिर सरकार के कामकाज का आंकलन कर रहा हो। फिलहाल विपक्ष के पास एक बड़ा मुद्दा हाथ लगा है और इस मुद्दे को विपक्ष अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहता है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टाॅलरेंस की बात करने वाली त्रिवेन्द्र सरकार पर अब विपक्ष का हमला बढ़ने लगा है। विपक्ष ने सरकार के कामकाज के आंकलन के लिए छह महीने का वक्त दिया था। लेकिन प्रदेश में कई ऐसे मामले सामने आए जिससे सरकार की साख पर सवाल खड़े हो गए। प्रदेश सरकार की आबकारी नीति, एनएच 74 की सीबीआई जांच और समाज कल्याण विभाग में छात्रवृति घोटाले के मामलों को लेकर विपक्ष सीधे सरकार पर हमलावर है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि एनएच 74 घोटाले की सरकार सीबीआई से जांच नहीं कराना चाहती। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने इस मामले में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार किसी बड़े को बचाना चाहती है। यही वजह है कि सीबीआई जांच की जगह पर एसआईटी से जांच कराकर सरकार खानापूर्ति कर रही है। वहीं शराब के मामले पर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने सरकार पर खुलेआम शराब की तस्करी कराने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार मोबाइल वैन से गली-मोहल्लों में शराब की बिक्री करा रही है। सरकार की शराब नीति पूरी तरह से फेल है और सरकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। समाज कल्याण विभाग में छात्रवृति घोटाले की सीबीआई जांच की विपक्ष ने मांग की है। वहीं विपक्ष के इन सभी आरोपों को सरकार ने सिरे से नकारा दिया है। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि इंदिरा हृदयेश अब विपक्ष में है तो उनको अब यही काम बचा है कि वो सरकार पर आरोप लगाएं सरकार की आलोचना करें। जबकि बीजेपी की सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टाूॅलरेंस के तहत काम कर रही है। जो आरोप इंदिरा दीदी लगा रही हैं वो उन्हीं की सरकार के दौरान के घोटाले हैं। वो सब्र करें हर घोटाले से बीजेपी सरकार पर्दा उठाएगी। राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड में चोर सिपाही का खेल खेला जा रहा है। जब बीजेपी सत्ता में होती है तो कांग्रेस के घोटालों की बात कही जाती है और जब कांग्रेस सत्ता में होती है तो बीजेपी पर घोटाले के आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन आज तक एक भी घोटाले से पर्दा नहीं उठ पाया और हर बात ढाक के तीन पात पर ही कहानी समाप्त हो जाती है।
सरकार और संगठन में समन्वय को लेकर दिल्ली से खुद बीजेपी के बड़े नेता माॅनीटरिंग में जुटे हैं। लेकिन त्रिवेन्द्र सरकार में कई मंत्रियों की खटपट सड़कों पर भी दिख रही है। अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर पहले सतपाल महाराज फिर धन सिंह रावत की नाराजगी खुलकर सरकार और संगठन की मुश्किल बढ़ा चुकी है। अब खबरें हरक सिंह रावत की नाराजगी की बनी हुई है।
खुद को सबसे बड़ी अनुशासित पार्टी का कहने वाली बीजेपी इन दिनों अपने ही नेताओं की आपसी खींचतान से परेशान है। ये परेशानी न सिर्फ संगठन ही है बल्कि सरकार के लिए भी सरदर्द बन गई है। हरिद्वार में बीजेपी के कई दिग्गजों के समर्थकों के बीच मारपीट जैसे मामले अभी सुलझे भी नहीं थे कि एक मंत्री की नाराजगी के एक और मामले से सरकार असमंजस की स्थिति में आ गई है। हालांकि मंत्री ने नाराजगी की बात से साफ इंकार किया है। लेकिन सूत्रों की माने तो मंत्री हरक सिंह रावत अपनी ही सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं। मामला जो भी लेकिन हरक सिंह की नाराजगी वन विभाग में कुछ फाईलों के पेंडिंग होने को लेकर और कोटद्वार में डाॅक्टर की तैनाती को लेकर खुद सीएम से है। खबरें ये हैं कि हरक सिंह की कई फाइलें चतुर्थ तल और सीएम आवास में धूल फांक रही हैं। जिसकी वजह से हरक सिंह खुद अधिकारियों को दो टूक सुना भी चुके हैं। तो वहीं सरकार के अन्दर चल रही खींचतान को लेकर अब विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार के मंत्रियों में समन्वय नहीं है और वे अपनी ही सरकार से दो-दो हाथ करने को तैयार बैठे हैं। सरकार के अन्दर खटपट की ये पहली कहानी नहीं है। त्रिवेन्द्र सरकार के गठन के तुरन्त बाद ही कई मंत्री अपनी ही सरकार से नाराज बताए जाने लगे थे। यही वजह रही कि कई मंत्रियों ने कैबिनेट की बैठक सू दूरी बना ली थी। फिलहाल सरकार और संगठन दोनों ऐसे मामलों पर निगरानी रख रहे हैं। लेकिन नाराजगी की ये बात बार-बार सामने आना त्रिवेद्र रावत के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।
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