राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का पहाड़ी अंदाज, युवाओं के लिए कही बड़ी बात

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    नैनीताल पहुंचे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में डीलिट की मानद उपाधि दी गई। पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइस के मास्टर माइंड और अपने साहस व कौशल के बल पर कीर्ति सम्मान हासिल करने वाले अजीत डोभाल उत्तराखंड की धरती पर पहाड़ी अंदाज में नजर आए।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने युवाओं के लिए बड़ी बात कही। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नौजवानों से 50 साल आगे के भारत के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समय लगातार बदल रहा है। बदलते जमाने के साथ चलने वाले ही सफलता का परचम लहराते हैं। डोभाल शुक्रवार को विवि के 14वें दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि ग्रहण करने के बाद संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि दुनिया में कभी शारीरिक शक्ति का बोलबाला था, इसके बाद जमीन के मालिक का महत्व रहा। इसके बाद कारोबार और सैन्य शक्ति ताकत का प्रतीक रहा। वर्तमान में तकनीकी रूप से मजबूत ही शक्ति का प्रतीक है, लेकिन आगे यही चलेगा, कहा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि उपाधि लेने वालों सकारात्मक सोच के साथ नए जीवन की शुरूआत करनी होगी। डोभाल ने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।

    पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी का उदाहण देते कहा कि कई बार हारने के बाजूद गौरी ने प्रयास जारी रखे और एक दिन जीत दर्ज कर ली। डोभाल ने कहा कि दुनिया में ज्ञान का भंडार भरा है। उन्होंने भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण के समय दिए गए उपदेश का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने शिष्यों से कहा था संसार को अंधकार से निकालने के लिए स्वयं दीपक बनना होगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति भी कई बार रास्ता दिखाती है। गंगा को गंगोत्री से गंगा सागर जाने का रास्ता आखिर किसने बताया। यह रास्ता स्वयं तय किया है।

    उत्तराखंडी नजर आए डोभाल 

    सर्जिकल स्ट्राइस के मास्टर माइंड व अपने साहस व कौशल के बल पर कीर्ति सम्मान हासिल करने वाले डोभाल उत्तराखंड की धरती में सामान्य पहाड़ी नजर आए। अपने संबोधन की शुरूआत में उन्होंने  क्षेत्र से भावनात्मक रिश्ता जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह मेरा जन्म से जुड़ा भूभाग है। मेरा सौभाग्य है कि मुझे देश दुनिया में अपना नाम रोशन कर रहे उत्तराखंड के कुमाऊं विवि में उपाधि मिली। उन्होंने इसको विनम्रता पूर्वक स्वीकार कर रहने की बात भी कही। डोभाल ने यह भी जोड़ा कि उनका कोई एकेडेमिक कॅरियर नहीं रहा है वे जीवन में एक प्रोफेसनल के तौर पर रहे हैं।

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