उत्तराखंड में 600 करोड़ का राशन घोटला, जाँच में चौंकने वाले तथ्य आये सामने

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    उत्तराखंड: गरीबों के लिए सस्ता अनाज उपलब्ध करने की योजना में सब कुछ इतना महंगा हुआ कि राज्य को 600 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया गया, सूबे की सरकार ने मंगलवार को SIT की जांच के मुख्य बिंदू जारी करते हुए इसे प्रदेश का अब तक का  सबसे बड़ा घोटाला करार दिया है. अभी इसकी विस्तृत जांच कराई जा रही है।

    सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर की गई इस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं. इस मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए आरएफसी एवं समाज कल्याण विभाग के निदेशक वीएस धनिक का सेवा विस्तार आज निरस्त कर दिया गया हैं मंगलवार शाम सरकार की ओर से जारी एसआईटी जांच के मुख्य बिंदुओं को इस गोलमाल की साफ-साफ तस्वीर सामने आई है. जांच में बाजपुर, काशीपुर रुद्रपुर किच्छा में संघन जांच अभियान चलाया गया जिसमे कई चौंकाने वाले कमियां सामने आई है. रुद्रपुर में सरकारी अनाज की बोरे गायब मिले तो 3680 बोरों में टैग ही गलत लगे थे, साथ ही धान की नीलामी या खुली नीलामी से बोली लगाई जाने की व्यवस्था केविल 5 से 10 फीसदी मामलों में ही अपनाई गई।

    • खरीद में घपला :  राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में तीन लाख सात हजार 692 कुंतल चावल 2310 रुपये कुंतल के हिसाब से खरीदा दो साल में 71 करोड सात लाख 68 हजार 520 रुपये का घपला
    • ट्रांसपोर्ट में घपला :  3,07692 कुंतल चावल के वितरण में ट्रांसपोर्टेशन शुल्क यदि 50 रुपए प्रति कुंतल माना जाए तो इसमें 1,53,84,600 रुपए का गोलमाल
    • बोरों में घपला : धान रखने के लिए  60 रुपए प्रति बोरे की दर से 3,69,23,040 रुपए का हर साल लगाया सरकार को चूना
    • बाहरी खरीद घपला:  यूपी और अन्य राज्यों से 50 लाख 47 हजार 948 कुंटल धान खरीदा गया। इसे कच्चा आढ़तियों से खरीदा दिखाते हुए लाखों रुपये की कर चोरी

    धान की बड़ी मात्रा जो राईस मिल द्वारा सीधे काश्तकारों से खरीद ली जाती है, उसको कच्चा आढती के माध्यम से खरीद दिखाई गई जबकि धान मंडी में नीलामी के लिए आया ही नहीं आया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अनाज घोटाले में चाहे जितना भी बड़ा अधिकारी या नेता शामिल होगा, उसको बख्शा नहीं जाएगा। जरूरत पड़ी तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

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