पर्यटकाें और पर्वताराेहियाें काे जान जाेखिम में डालकर करना पड़ रहा ट्रैक

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चमोली: जाेशीमठ,३० किमी० लम्बे चेफन्या-घूनी-पाणा-क्वांरीपास एतिहासिक लार्ड कर्जन ट्रैक रूट पर कई जगहाें पर पर्यटकाें और पथाराेहियाें काे जान जाेखिम में डालकर ट्रैक करना पड़ रहा है, इस रूट के महत्वपूर्ण कैम्पसाईटाें पर वन विभाग की काेई व्यवस्थायें नही है,और न ही जिला पंचायत नें यहां के पैदल आवाजाही पुलाें की मरम्मत करवायी है, मानसून में जब नालाें का जलस्तर बढ जाता है[ads1] ताे यहां पर्यटकाें सहित घाेडा खच्चराें काे आर पार करवाना मुश्किल हाे जाता है, इस रूट पर सरताैली बुग्याल से लेकर डाेमाबिठी,और ढकवानी में ट्रैक रूट बदहाल हाे रखा है,बदरीनाथ वन विभाग और नन्दादेवी नेशनल पार्क के छेत्र में पडने वाले इस एतिहासिक ट्रैकरूट पर प्रतिवर्ष हजाराें पर्यटक पथाराेहण हेतु आते है लेकिन इसरूट पर मार्ग मरमत्तीकरण का काम ढंग से नही हाेने से पर्यटक दलाें काो काफी मुश्किले आ रही है, वही क्वारी बुग्याल का गैलगड पुल भी ग्लेशियर [ads1]से टूटने के चलते कई वर्षाे से टूटा है लेकिन इस पुल काे भी अभीतक दुरस्त नही किया गया है,जबकि पर्यटन व्यवसायी प्रति दल विभाग काे परमिट शुल्क दे रहे है और सुविधाओ के नाम पर कुछ नही है,बता दें कि इस एतिहासिक ट्रैक रूट पर सर्वप्रथम 1901में ब्रिटिश गवर्नर जनरल लार्ड कर्जन ६फुट की पैदल मार्ग वाले क्वारी दर्रे काे पार कर यहां पहुचा था इनके नाम पर ही इस रूट का नांम लार्ड कर्जन ट्रैक रूट पडा था, वर्तमान में यह पर्यटन स्थल देश के १०बेहतर ट्रैकिंग स्थलाें में एक गिना जाता है,

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