42 साल से ‘सपनों’ में सड़क और डंडी-कंडी पर ‘जिंदगी’

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कालसी: सड़क स्वीकृत होने के बावजूद 21वीं सदी में प्रदेश की राजधानी से सटे कालसी ब्लॉक के सड़क विहीन गांवों के लोग डंडी-कंडी पर मरीज को लेकर 30 किमी का पैदल सफर कर अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में सरकारों की ओर से किए गए विकास के सारे दावे धरे के धरे रह जाते हैं। यह कहानी है फाइलों में स्वीकृत बेवड़धार-लुहन बैंड मोटर मार्ग की, जिसका वर्ष 1975 में सर्वेक्षण हुआ था। सर्वेक्षण के बाद 13 गांव के लोगों को सड़क से जुड़ने का सपना सच होता नजर आया था। लेकिन, अफसोस आज 42 साल बीतने के बाद भी यह सड़क क्षेत्र के सात हजार ग्रामीणों के सपनों से धरातल पर नहीं उतर पाई है।

सड़क को विकास का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। लेकिन, उत्तराखंड में आज भी कई गांव सड़क विहिन हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सरकारें भी इन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए ईमानदारी से प्रयास करती नजर नहीं आ रही हैं। इसका एक उदाहरण कालसी तहसील क्षेत्र का बेवड़ाधार-लुहन बैंड मोटर मार्ग है। शासन से स्वीकृति के बाद वर्ष 1975 में मोटर मार्ग के लिए सर्वेक्षण कार्य किया गया। लेकिन, सड़क सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाई। नतीजतन, क्षेत्र के 13 गांव आज भी सड़क सुविधा को तरस रहे हैं।

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