इस सत्र में बीते सत्र की तुलना में 51673 छात्र-छात्राओं ने इन विद्यालयों से मुंह मोड़ा

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देहरादून-  सरकार शिक्षा पर सालाना 50 अरब से ज्यादा लुटा रही है तो राज्य का सबसे बड़ा महकमा शिक्षा स्कूल चलो का राग अलाप रहा है, लेकिन प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक सरकारी विद्यालय छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का भरोसा जीतने में कामयाब नहीं हो पा रहे।

साल-दर-साल सरकारी विद्यालयों में गिर रही छात्रसंख्या ने शैक्षिक सत्र 2016-17 में नीचे गहरा गोता लगाया है। इस सत्र में बीते सत्र की तुलना में 51673 छात्र-छात्राओं ने इन विद्यालयों से मुंह मोड़ा है। ये सिलसिला मैदानी क्षेत्रों के साथ अब पहाड़ों पर भी गंभीर रूप ले चुका है। सरकारी विद्यालयों को बड़ा झटका देने वालों में ऊधमसिंहनगर के बाद पौड़ी और अल्मोड़ा जिले क्रमश: दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं।

नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के साथ ही शिक्षा मंत्री से लेकर महकमे के आला अधिकारी स्कूल चलो का हांका लगा रहे हैं। लगातार घटती छात्रसंख्या से सरकार और महकमे के माथे पर बल पड़े हैं। दरअसल, विद्यार्थियों को सरकारी विद्यालयों की ओर खींचने में जुटा सरकारी तंत्र खुद समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए इच्छाशक्ति की कमी से जूझ रहा है।

दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालय लंबे अरसे से शिक्षकों की कमी का रोना रो रहे हैं। शिक्षकों का जमावड़ा दुर्गम से छंटकर सुगम में बढ़ने और सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन को भगवान भरोसे छोड़ने का नतीजा ये है कि अभिभावक अपने बच्चों को नजदीकी निजी विद्यालयों में भेजना पसंद कर रहे हैं।

आरटीआइ के तहत 25 फीसद बच्चों को पब्लिक स्कूलों में दाखिल कराने की होड़ सरकारी शिक्षा की बदहाली की दास्तान बयां करने को काफी है। प्राथमिक विद्यालयों में 30 छात्रों पर एक शिक्षक का अनुपात घटकर तकरीबन 15 छात्रों पर एक शिक्षक तक पहुंच चुका है।

चिंताजनक ये है कि मैदानी क्षेत्रों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में भी सरकारी विद्यालयों के प्रति अभिभावकों और छात्र-छात्राओं का मोह भंग बढ़ा है। वर्ष 2016-17 में 2015-16 की तुलना में सिर्फ कक्षा एक से पांचवीं में ही छात्रसंख्या में 28158 की कमी आ चुकी है। छठवीं से आठवीं तक यह गिरावट 9610 छात्र है। नवीं में 3992, दसवीं में 8877, ग्यारहवीं में 1036 छात्र कम हुए हैं। सिर्फ बारहवीं कक्षा में ही छात्रसंख्या में 115 की मामूली बढोतरी हुई। ये हाल तब है, जब इस अवधि में राज्य में विद्यालयों की संख्या में भी सात का इजाफा हुआ है।

जिलेवार 2016-17 में कक्षा एक से आठवीं तक छात्रसंख्या में गिरावट

जिले———————–छात्रसंख्या में कमी

ऊधमसिंहनगर—————6207

पौड़ी—————————-5541

अल्मोड़ा———————–4261

हरिद्वार———————–4202

देहरादून———————–4064

टिहरी————————–3897

नैनीताल———————–2917

उत्तरकाशी——————–2869

चमोली————————-1886

पिथौरागढ़———————1502

चंपावत————————1499

रुद्रप्रयाग———————–1117

बागेश्वर————————-506

 

प्रदेश मीडिया

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