दबी रहेगी या फिर खुलेगी घोटालों की पोटली

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प्रदेश को अस्तित्व में आए सोलह साल बीत चुके हैं। अब तक प्रदेश में तीन निर्वाचित सरकारें आ चुकी हैं और चौथी जल्द ही अस्तित्व में आ जाएगी। इन सोलह सालों में सत्ता और विपक्ष में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस ने एक दूसरे पर तमाम घोटालों के आरोप लगाए। सड़क से लेकर सदन तक हंगामा काटा गया। बावजूद इसके जब भी इन दोनों में से कोई सत्ता में आया तो घोटालों को बोतल में बंद करता चला गया। यह बात दीगर है कि समय समय पर घोटालों का जिन्न बोतल से बाहर निकाल कर विपक्ष को डराने का काम किया गया। निर्वतमान कांग्रेस सरकार भी इससे इतर नहीं रही। कांग्रेस सरकार ने भी भाजपा शासन काल में हुए तमाम घोटालों पर जांच की बात कही। इनमें टैक्सी बिल, स्टुर्जिया, कुंभ, ढैंचा आदि घोटाले शामिल हैं। इसके लिए सरकार ने जांच आयोग बनाए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट भी दी लेकिन यह कभी सार्वजनिक नहीं की गई। अब स्थिति बदल गई हैं। भाजपा ने बीते पांच साल में विपक्ष में रहते हुए तमाम घोटाले गिनाए हैं। इनमें आपदा, हवाई सेवा, शराब, कंप्यूटर खरीद, सिडकुल भूमि व हाईवे में भूमि अधिग्रहण के लिए किया गया घोटाला आदि शामिल हैं। भाजपा ने यह चुनाव भी भय और भ्रष्टाचार के नारे पर लड़ा है। जाहिर है कि जनता को नई सरकार से खासी उम्मीदें है। उम्मीद की जा रही है कि पूर्ववर्ती सरकार के घोटाले, विशेषकर बीते दो वर्ष में हुए घोटालों को लेकर नई सरकार सख्त कदम उठाएगी। जनता की नजरें इस बात पर भी है कि भाजपा पुरानी सरकारों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इन घोटालों को दबाएगी या फिर कोई ठोस कार्रवाई करेगी।

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