फिर हुआ उत्तराखंड का एक और सपूत देश के लिए कुर्बान

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देश का जवान…देश का सच्चा सपूत, जो मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों को भी कुर्बान करने से नहीं घबराता। ऐसे जवानों की अगर असमय मौत हो जाए, तो दुख होता है। ऐसे ही देश के एक वीर जवान के साथ हुआ है। इस सैनिक के घर में परिवार वाले उसकी शादी की तैयारियों में जुटे थे। जोर शोर से तैयारियां चल रही थी लेकिन वो तिरंगे में लिपटा घर पहुंचा। खबरों मुताबिक पंजाब के फिरोजपुर में पानी में डूबने से एक फौजी की मौत हो गई। 20 वीं गढ़वाल राइफल में तैनात रॉबिन बिष्ट के परिवार में इस खबर के बाद से मातम मचा है। पट्टी बालीकंडारस्यूं के डुमलोट गांव के रहने वाले थे रॉबिन बिष्ट। बताया रहा है कि 23 मार्च को रॉबिन लापता हो गए थे। इसके बाद उनका शव 24 मार्च को मिला। इस नौजवान सैनिक की मौत की खबर के बाद उनके घर परिवार में मातम पसरा है। खास बात ये भी बताई जा रही है कि रॉबिन का परिवार उनकी शादी की तैयारी कर रहा था। परिवार वालों का सपना था कि घर में एक बहु आए और घर-आंगन में रौनक भर जाए। लेकिन इस दुखद खबर के बाद से परिवारवालों के आंसू थमने का नाम नहीं रहे। पिता मानवेंद्र सिंह का कहना है कि रॉबिन की सगाई सांसौ गांव में तय हुई थी। परिवार वाले पूरी तैयारियों में जुटे थे और एक खबर से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता की आंखों में आंसू हैं और वो रह रहकर अपने बेटे को याद कर रहे हैं। दुख की इस घड़ी में हर कोई परिवार को ढाढस बंधा रहा है लेकिन एक बेटे का जाना क्या होता है, वो परिजन ही जानते हैं। हालांकि उनकी मृत्यु कैसे हुए है इस बात की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी मेजर कर्ण सिंह के मुताबिक ये एक दुखद घटना है। रॉबिनका पार्थिव शरीर लैंसडौन छावनी में लाया गया था। सोमवार को उनके पैतृक घाट पर उन्हें अंतिम विदाई दी गई। रॉबिन बिष्ट के पिता मानवेंद्र सिंह को इस बारे में खबर मिली थी कि उनका बेटा 23 मार्च से लापता है। 24 मार्च को रॉबिन के पिता को खबर दी गई कि उनके बेटे की मृत्यु हो चुकी है। कुछ दिन पहले ही एक फौजी संदीप सिंह पूनिया की भी हार्ट अटैक से मृत्यु हो गयी थी। हिसार के रहने वाले सैनिक संदीप सिंह पूनिया की मौत की खबर से ही देशवासियों का दिल भर आया था। संदीप का तीन महीने का बेटा है, जिससे वो अभी तक नहीं मिले थे। देश की सेवा के लिए संदीप सिंह पूनिया बॉर्डर पर तैनात रहे और अपने बेटे को भी एक बार नहीं देख पाए। याद संदीप के बाद अब एक और सपूत चला गया, जिसके घर में शादी की तैयारी चल रही थी। ये देश के वीर जवान ही हैं, जिनकी बदौलत हम आज चैन की सांस ले पा रहे हैं। असमय मौत होना दुखद है, भगवान इस परिवार को दुख सहने की हर शक्ति प्रदान करे।

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