स्वाइन फ्लू की हवा, विभाग को ‘लकवा’

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देहरादून: देश के विभिन्न राज्यों में स्वाइन फ्लू कहर बरपा रहा है। उत्तराखंड में भी इससे एक मरीज की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके अपना स्वास्थ्य विभाग अचेत अवस्था में नजर आ रहा है। हद तो यह कि स्वाइन फ्लू पर छीछालेदर से बचने के लिए महकमा जानकारी दबाने पर उतर आया है। इसका ताजा उदाहरण है स्वाइन फ्लू से हुई 52 वर्षीय अधेड़ की मौत का मामला। जिसे विभाग करीब 10 दिन दबाए बैठा रहा।

उत्तराखंड में दस्तक दे चुके स्वाइन फ्लू से राजावाला निवासी व्यक्ति की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमा सकते में जरूर है, मगर इस बीमारी से निबटने को जो तेजी दिखाई जानी चाहिए वह नजर नहीं आ रही। अकेले देहरादून जिले की ही बात करें तो अब तक यहा चार लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। 27 लोगों के सैंपल जाच के लिए भेजे गए हैं। ऐसे में स्वाइन फ्लू की स्थिति को समझा जा सकता है। फिर भी स्वास्थ्य महकमा सतर्क नहीं दिख रहा। अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाने का दावा तो किया जा रहा है, मगर हकीकत में अभी तक कई अस्पतालों में स्वाइन फ्लू को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इससे विभाग की तैयारियों को बखूबी समझा जा सकता है।

ऐसे सक्रिय होता है स्वाइन फ्लू

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रवीण पंवार के मुताबिक स्वाइन फ्लू का वायरस 30 डिग्री से कम तापमान पर अधिक सक्रिय रहता है। वायरस के प्रसार में ठंड व नमी मददगार होती है। हवा में जितनी नमी होगी वायरस के फैलने का डर उतना अधिक रहेगा। जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होगी, यह वायरस कमजोर पड़ने लगेगा।

ये हैं स्वाइन फ्लू की कैटेगिरी

कैटेगिरी-ए

-हल्के बुखार के साथ खासी व गले में खरास।

-सैंपल की आवश्यकता नहीं।

-लक्षण के आधार पर उपचार की आवश्यकता।

-रोगी खुद को घर पर ही आइसोलेट करें, लोगों से मिलने-जुलने से परहेज करें।

-स्वाइन फ्लू की औषधि की आवश्यकता नहीं।

कैटेगिरी-बी

-कैटेगिरी-ए के साथ तेज बुखार व गले में अत्यधिक खरास।

-रोगी खुद को घर पर ही आइसोलेट करें, लोगों से मिलने-जुलने से परहेज करें।

-लक्षण के आधार पर एंटी वायरल की आवश्यकता पड़ सकती है।

-रिपोर्ट आने तक एक गोली प्रतिदिन खाएं।

कैटेगिरी-सी

-कैटेगिरी-ए व बी के साथ अत्यधिक सांस फूलना, बेचैनी व लो ब्लड प्रेशर।

-अस्पताल में भर्ती होने के साथ खून की जाच की जरूरत होती है।

-लक्षण के आधार पर एंटी वायरल की आवश्यकता व रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर एक-एक गोली सुबह-शाम चिकित्सक के निर्देशानुसार।

-लक्षण के आधार पर उपचार की आवश्यकता।

-भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से परहेज करें।

ये सावधानिया बरतें

-हाइजीन का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए। खासते समय और छींकते समय टीशू रखें। इसके बाद टीशू नष्ट कर दें।

-बाहर से आकर हाथों को साबुन से अच्छे से धोएं, एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

-जिन लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण हों तो उन्हें मास्क पहनना चाहिए और घर में ही रहना चाहिए।

-स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीज के संपर्क में आने से बचें। हाथ मिलाने से बचें। नियमित अंतराल पर हाथ धोते रहें।

-जिन लोगों को सास लेने में परेशानी हो रही हो और तीन-चार दिन से तेज बुखार हो, उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

-स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए गले और नाक के द्रव्यों का टेस्ट होता है। जिससे एच1एन1 वायरस की पहचान की जाती है। ऐसा कोई भी टेस्ट डॉक्टर की सलाह के बाद ही कराएं।

 

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