संत ने DM दीपक रावत पर लगाया बंधक बनाकर मारने की कोशिश का आरोप, कोर्ट में वाद दायर

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मातृसदन ने बंधक बनाकर जान से मारने की नीयत से हमला करने समेत कई धाराओं में हरिद्वार के जिलाधिकारी और उनके सुरक्षाकर्मी पर वाद दायर किया है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के लिए अग्रिम तारीख 27 जनवरी 2018 तय की है।

मातृसदन के बह्मचारी दयानंद ने दायर शिकायत में कहा कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने 25 दिसंबर 2017 को ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान पर्चे बांटे थे। समारोह में हरिद्वार डीएम दीपक रावत को पंडित मदनमोहन सम्मान से सम्मानित किया जा रहा था। जिस पर शिकायतकर्ता के गुरुभाई और पीड़ित ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने सम्मान दिए जाने पर विरोध जताया था। दायर शिकायत में आरोप लगाया कि डीएम और उनके गनर के इशारे पर पुलिस कर्मचारी आत्मबोधानंद को वीआईपी रूम में ले गए, जहां उसे बंद कमरे में बंधक बनाकर जान से मारने की नीयत से बुरी तरह पीटा गया।

घटना के दौरान वीडियो कैमरा पूरी तरह से बंद करवा दिया था। इसके बाद पुलिसकर्मी पीड़ित आत्मबोधानंद को बाइक पर बैठाकर नगर मजिस्ट्रेट हरिद्वार के यहां ले जाकर शांतिभंग करने के आरोप में जेल भेजा था। दायर वाद में विपक्षीगण पर आरोप लगाया कि नगर मजिस्ट्रेट के छोड़ने के आदेश को दरकिनार कर जेल से नहीं छोड़ा गया, बल्कि दो दिन बाद पीड़ित को छोड़ा गया था। घटना में काफी चोटें आने पर आहत और चलने फिरने में असमर्थ है। फिलहाल, पीड़ित का उपचार चल रहा है। दायर वाद में डीएम पर पीड़ित के मोबाइल में से समस्त डाटा साक्ष्य मिटाने के लिए गायब करने का आरोप लगाया है। मातृसदन के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने बताया कि सीजेएम कोर्ट ने दायर वाद को दर्ज कर अग्रिम तिथि 27 जनवरी 2018 शिकायतकर्ता के ब्यान दर्ज करने के लिए मुकर्रर की है।

प्रशासन के आदेश पर कोर्ट की रोक

मातृसदन के स्वामी शिवानंद का अवैध खनन के विरुद्ध तपस्या करने पर स्वास्थ्य हानि, बलवा और दंगे की वजह से प्रशासन के खिलाफ लोगों का आक्रोश उत्पन्न हो सकता है, इसी आशंका अपर जिला मजिस्ट्रेट भगवत किशोर मिश्रा ने मातृसदन के स्वामी शिवानंद को आदेश की प्रति भेजकर प्राप्ति के बाद भोजन ग्रहण न करने पर जीवन व स्वास्थ्य लाभ देने के लिए अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा गया है। मातृसदन ने उक्त आदेश के खिलाफ चुनौती याचिका जिला जज कोर्ट में दायर की। सेशन कोर्ट ने प्रशासन द्वारा भेजे आदेश की प्रति पर रोक लगाते हुए अग्रिम तिथि 31 जनवरी मुकर्रर की है।

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