लाइन पूरी,बैंक और ATM खाली, नोटबंदी की अबतक की कहानी

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note2 note3नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में कामकाज ठप है। इन सबके बीच स्पीकर द्वारा कुछ सकारात्मक कदम उठाने की उम्मीद जताई जा रही है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नोटबंदी पर संसद में जारी गतिरोध का रास्ता निकालने को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच शह मात का दौर अब भी जारी है। गतिरोध का समाधान निकालने के लिए कांग्रेस अब स्पीकर सुमित्रा महाजन के प्रश्नकाल स्थगित कर बिना किसी नियम के लोकसभा में चर्चा शुरू करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखा रही है। सरकार भी गैर वोटिंग प्रस्ताव के तहत चर्चा कराने को तैयार है। सियासी संग्राम का हल निकालने की इन कोशिशों के बीच विपक्ष ने गुरुवार को संसद परिसर में नोटबंदी के मुद्दे पर धरना देने का एलान किया है। विपक्ष के इस एलान की वजह से संसद का गतिरोध दूर करने की पर्दे के पीछे हो रही पहल पर संशय बरकरार है।

नोटबंदी पर सिर्फ हो रहा है हंगामा

शीत सत्र में अब तक एक दिन भी नहीं चली संसद की कार्यवाही बुधवार को भी तमाम कोशिशों के बावजूद विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई। संसद के लगातार ठप रहने से सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बन रही असहज स्थिति के मद्देनजर कांग्रेस ने इसका ठीकरा अपने सिर से उतारने के लिए बुधवार को स्पीकर के प्रस्ताव को लपक लिया। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में प्रश्नकाल स्थगित कर गुरुवार को चर्चा शुरू करने और प्रधानमंत्री के इसमें हस्तक्षेप के जरिए बयान देने का प्रस्ताव दिया है। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार इस पर सरकार में मशविरा कर विपक्ष को जवाब देने की बात कही। गौरतलब है कि स्पीकर ने बीते सप्ताह विपक्ष को यही प्रस्ताव दिया था तब इसे ठुकरा दिया गया था।

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पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

समझा जाता है कि संसदीय कार्यमंत्री ने खड़गे के प्रस्ताव पर तत्काल जवाब इसीलिए नहीं दिया, क्योंकि विपक्ष ने 8 दिसंबर को नोटबंदी के एक महीना पूरा होने पर संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने काली पट्टी लगाकर विरोध का फैसला किया है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने विपक्ष के संयुक्त रूप से इस धरने की घोषणा की। सरकार की आशंका यह है कि वह प्रस्ताव पर राजी भी हो जाती है तो भी विपक्ष अपने विरोध प्रदर्शन की सुर्खियों के लिए सदन गुरुवार को चलने देगा, इसको लेकर भरोसा नहीं है। सरकार की इस आशंका की वजह बुधवार को राज्यसभा और लोकसभा दोनों में विपक्ष का रुख भी रहा। राज्यसभा में नोटबंदी से लोगों को अपने ही पैसे के लिए दर-दर भटकने की बातें तो विपक्ष ने उठाई। मगर सदन में चर्चा शुरू करने की पहले सरकार की अपील और फिर चुनौती दोनों की अनदेखी की।

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सरकार की नीति-नीयत पर सवाल

राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद, सीताराम येचुरी और आनंद शर्मा आदि ने नोटबंदी में कालेधन पर सरकार के दावों के पंक्चर होने से लेकर लोगों की दिक्कतों से जुड़े कई सवाल सदन में उठाए। इस दौरान आजाद ने राजस्व सचिव के नोटबंदी में सभी रकम के वापस आने के बयान पर भी सफाई मांगी। साथ ही सदन में प्रधानमंत्री की उपस्थिति की मांग की।

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राज्यसभा में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष को बहस की चुनौती देते हुए कहा कि जब सरकार के तर्कों को गलत साबित करने का दम है तो फिर वह बहस से क्यों भाग रहा है। इतना ही नहीं जेटली ने कहा कि सदन में पीएम चर्चा में हिस्सा लेंगे और जवाब भी देंगे। लेकिन यह मांग अनुचित है कि पीएम हर पल सदन में बैठे रहें। उन्होंने कहा कि संसद में ऐसी कोई परंपरा भी नहीं रही है। उपसभापति कुरियन ने भी चर्चा शुरू कराने की भरसक कोशिश की, मगर विपक्ष नहीं माना और सदन स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में भी लगभग यही दृश्य दोहराया गया और स्पीकर को हंगामे की वजह से कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।

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