यहां प्रकृति ने बिखेरी हैं नेमतें, सरकार ने फेरी निगाहें

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उत्तरकाशी : उत्तरकाशी जिले की गंगा-यमुना घाटी में प्रकृति ने अपने सौंदर्य का खजाना बिखेरा है। बावजूद इसके कुछ खास स्थल आज भी पर्यटकों की नजर से ओझल हैं। क्यारकोटी इन्हीं में से एक है। यहां, प्रकृति ने तो नेमतें बिखेरी हैं, लेकिन सरकार ने इसकी तरफ निगाह फेरी हुई है।

भारत-चीन सीमा से लगे क्यारकोटी क्षेत्र में बुग्याल (मखमली घास के मैदान), झील, झरने व गगनचुंबी पहाड की कोई कमी नहीं है। लेकिन, जिम्मेदारों की नजर इधर नहीं गई। यही वजह है कि अब पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों ने क्यारकोटी को ‘ट्रैक ऑफ द ईयर’ घोषित करने की मांग की है। ताकि यह क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर आ सके।

क्यारकोटी जाने के लिए जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 75 किलोमीटर दूर हर्षिल-बगोरी तक सड़क सुविधा उपलब्ध है। जबकि, हर्षिल से पांच किलोमीटर की पैदल दूरी लाल देवता का मंदिर पड़ता है। यह स्थल बगोरी की जाड़ व भोटिया जातियों का प्रमुख धार्मिक स्थल है। लाल देवता मंदिर से क्यारकोटी की दूरी पांच किलोमीटर है। जो कि समुद्रतल से करीब 3200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बेहद रमणीक स्थल है। यहां कदम-कदम पर छोटे-छोटे ताल, झरने व बुग्याल सम्मोहन सा बिखेरते प्रतीत होते हैं।

गढ़वाल हिमालयन ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा बताते हैं कि क्यारकोटी से एक रास्ता नेलांग और दूसरा रास्ता लंबखागा पास होते हुए बड़ासू पास पहुंचता है। बड़ासू पास से एक रास्ता हरकीदून और दूसरा हिमाचल प्रदेश के छितकुल को जाता है। हर्षिल से लेकर छितकुल तक पांच दिन का ट्रैक है।

ग्राम प्रधान बगोरी भवान सिंह राणा कहते हैं कि पर्यटन विभाग ने बीते वर्षों में चाईंशिल और दयारा बुग्याल ट्रैक को ‘ट्रैक ऑफ द ईयर’ घोषित किया गया था। इसी तरह अब क्यारकोटी ट्रैक को भी ‘ट्रैक ऑफ द ईयर’ घोषित किया जाना चाहिए।

उत्तरकाशी के सहायक जिला पर्यटन अधिकारी बीपी टम्टा के मुताबिक किसी भी ट्रैक को ‘ट्रैक ऑफ द ईयर’ घोषित करना शासन स्तर का मामला है। ट्रैक कितना विकसित हो रहा है, यहां कितने सैलानी पहुंच रहे है, यह जानकारी शासन को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग की है। विभाग इस दिशा में कार्य कर रहा है। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया संपन्न होगी।

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