महाभारत काल के निशां को फिर से जीवंत करने में करना होगा इंतजार

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देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: देहरादून के जनजातीय जौनसार बावर क्षेत्र में पांडवकालीन लाखामंडल से पुरोला तक प्रस्तावित महाभारत सर्किट को लेकर इंतजार बढ़ गया है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से केंद्र सरकार की ‘स्वदेश दर्शन योजना’ में यह कांसेप्ट भेजा गया, लेकिन वहां से इसे अभी हरी झंडी नहीं मिली है।

हालांकि, परिषद इस योजना से संबंधित प्रस्ताव को फाइनल करने में जुटी है और इसमें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के पहलू को भी शामिल किया जा रहा है। माना जा रहा कि फिलवक्त स्वदेश दर्शन में इसे जगह नहीं मिल पाती है तो राज्य सरकार खुद अपने स्तर पर भी कुछ पहल कर सकती है

जौनसार बावर क्षेत्र में देहरादून के चकराता, त्यूणी, देववन और लाखामंडल के साथ ही उत्तरकाशी जिले के पुरोला तक पसरे महाभारत काल के निशां फिर से जीवंत करने के साथ ही इन्हें पर्यटकों की निगाह में लाने के मकसद से राज्य सरकार ने महाभारत सर्किट बनाने का निर्णय लिया है

हालांकि, लाखामंडल स्थित लाक्षागृह समेत अन्य स्थलों को देखने सैलानी जाते हैं, मगर इनकी संख्या बेहद कम है। इसकी मुख्य वजह इस क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं का न पसर पाना है। इस लिहाज से सर्किट बनने पर वहां न सिर्फ सुविधाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकेंगे।

इस सबको देखते हुए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से महाभारत सर्किट का कांसेप्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया, ताकि इसे स्वदेश दर्शन योजना में शामिल किया जा सके। केंद्र ने इसे सराहा जरूर, लेकिन केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने अभी तक इसे हरी झंडी नहीं दी है।

बता दें कि स्वदेश दर्शन में शामिल की जाने वाली योजना का केंद्रीय टीम खुद मौके पर आकर परीक्षण करती है। फिर वह अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपती है। इसके बाद केंद्र से 100 करोड़ की राशि दी जाती है। अभी तक ऐसी कोई टीम महाभारत सर्किट के मद्देनजर यहां नहीं पहुंची है।

हालांकि, परिषद की ओर से इस सर्किट के प्रस्ताव को फाइनल आकार देने की कवायद प्रारंभ कर दी गई है। परिषद के निदेशक (नियोजन) पुरुषोत्तम के अनुसार योजना के तहत लाखामंडल में म्यूजियम, हरिद्वार से लेकर देहरादून, लाखामंडल व पुरोला तक साइनेज, लाखामंडल क्षेत्र की गुफाओं का संरक्षण, पर्यटन सुविधाएं समेत अन्य कार्य प्रस्तावित हैं।

इसके अलावा क्षेत्र में पांडवों के प्रवास से जुड़ी जानकारी संकलित कर दस्तावेजों के माध्यम से जगह-जगह प्रदर्शित किया जाएगा। यही नहीं, अब इसमें सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के बिंदु को शामिल किया गया है। जल्द ही पूरा प्रस्ताव तैयार कर लिया जाएगा।

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