मशरूम गर्ल दिव्या रावत को मिली धमकी, शिकायत में विनोद सिंह रागढ़ का नाम

0

थाने पहुंच शिकायत में उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर की रात को 15-20 लोग अचानक उनके घर के बाहर आ धमके, जिसके बाद उन्होंने ना केवल उनके साथ बदतमीजी की, बल्कि उनके मशरूम के काम को बंद कराने का भी धमकी दी। दिव्या रावत का कहना है कि यह काम किसी राजनीतिक षड्यंत्र के बिना नहीं हो रहा है। कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ है।

शिकायत लेकर थाने पहुंचीं दिव्या
दिव्या रावत ने अपनी शिकायत में लिखा है, कि वह उस भीड़ में से वैसे तो किसी को नहीं जानती हैं, लेकिन एक शख्स को तो उन्होंने पहचान लिया। जिसके बाद उन्होंने शिकायत में विनोद सिंह रागढ़ का नाम दिया है।

कौन हैं दिव्या रावत

राज्य की बेटी दिव्या ने पहाड़ में एक ऐसा व्यवसाय खड़ा किया है, जिसके कारण वह आज उत्तराखंड की मशरूम लेडी के रूप में जानी जाती हैं। वह चाहतीं तो किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में मोटी सैलरी पर नौकरी कर सकती थीं, लेकिन वह जब वह नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ रही थीं, तब उन्हें लगा कि वह किसी बड़े शहर में रहकर वह काम नहीं कर सकतीं जो पहाड़ में रहकर किया जा सकता है।

मशरूम गर्ल के रूप में देश सहित विदेशों में भी बनाई है पहचान
एमिटी यूनिवर्सिटी में सोशल वर्क की छात्रा रहीं दिव्या मशरूम गर्ल के नाम से देशभर में जानी जाती हैं। उन्होंने मशरूम उगाने के साथ-साथ पहाड़ की कई महिलाओं को रोजगार भी देने का काम किया है। इसी साल महिला दिवस के अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी उन्हें उनके अद्भुत योगदान के लिए सम्मानित भी किया था। जिसके बाद उत्तराखंड सरकार ने दिव्या को ‘मशरूम की ब्रांड एम्बेसडर’ घोषित कर दिया।

दिव्या ने पहाड़ों में खंडहर हो चुके मकानों में अपने मशरूम का व्यवसाय खड़ा किया है। उनकी मशरूम कंपनी ‘सौम्य फ़ूड’ विदेशों तक मशरूम का एक्सपोर्ट कर करोड़ों का टर्नओवर कर रही है।

पहाड़ों पर महिलाओं को रोजगार देने का काम कर रही हैं दिव्या
दिव्या ने कहा था कि ‘मैं कोई असाधारण काम नहीं कर रही हूं, मैं बस एक सामाजिक दायित्व को निभा रही हूं। मैं उत्तराखंड की निवासी हूं। जब मैं यहां आयी तो पता चला कि जीविका और रोजगार यहां के सामाजिक मुददे हैं। जिन्हें हल करने के लिए मैंने यहां के लोगों और यहां की भूमि का अध्ययन किया। जिसमें पाया कि कृषि क्षेत्र में अगर ठोस कदम उठाया जाए तो गांव के लोगों को लाभ जरूर मिलेगा और युवाओं को रोजगार की तलाश में शहर भी नहीं जाना पड़ेगा।

इसी तरह की समस्याओं को हल करने के लिए दिव्या ने ये कदम उठाया है, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनके अच्छे कामों को लेकर ही उन्हें धमकियां भी मिलने लगेंगी।

Loading...