प्रदेश मे विधानसभा चुनाव निपटने के बाद अब चुनावी गणित में जुटे राजनितिक पंडित

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देहरादून:प्रदेश मे विधानसभा चुनाव निपटने के बाद अब हर किसी की नजर चुनाव परिणाम पर है. जहां कई दिग्गजों की किस्मत तय होनी हैं. वही इस बार कई बड़े सुरमा ऐसे हैं जो अगर इसबार जितकर आते हैं तो लगातार तिसरी बार वह जितकर विधानसभा पहुंचेंगे वही कुछ बड़े राजनेता ऐसे भी हैं जिनके सामने लगातार तिसरी बार हारने की डर हैं.

देखते हैं रिपोर्ट विधानसभा चुनाव के बाद अब हर किसी को इंतजार है चुनावी परिणाम का. जहां दिग्गजों की किस्मत का फैसला इवीएम मशीनों में कैद है. चुनाव परिणाम को लेकर हर उम्मीदवार की धड़कने भी तेज हो रखी है. हर प्रत्याशी चाहता है की वह जितकर विधानसभा पहुंचे. वही जब हम प्रदेश को कुछ दिग्गज नेताओं की बात करते हैं तो नजर आता है की उनके लिए जितना बेहद जरुरी है. कई नेता ऐसे हैं जो लगातार दो बार जीतकर विधानसभा पहुंच चुके हैं और इसबार अगर वह जितते हैं तो हैट्रिक पूरी. वही कई दिग्गज ऐसे भी है जो लगातार दो बार हार का स्वाद चख चुके हैं तो अगर वह इसबार भी हारते हैं तो उनकी भी हार की हैट्रिक पूरी. नजर डालते हैं ऐसे कुछ बड़े नामों पर वह नेता जिनको है लगातार तिसरी जित का इंतजार मनोज तिवारी- कांग्रेस नेता मनोज तिवारी 2007 और 2012 में जितकर विधानसभा पहुंचे, दो बार अल्मोड़ा से विधायक रहने वाले मनोज तिवारी ने इसबार फिरसे अल्मोड़ा सीट पर दाव लगाया है. प्रेम चंद्र अग्रवाल बीजेपी नेता प्रेम चंद्र अग्रवाल बीजेपी के टिकट पर ऋषिकेश विधानसभा से 2007 और 2012 में जितकर विधानसभा पहुंचे थे एकबार फिरसे वह ऋषिकेश से चुनाव लड़ रहे हैं. गणेश जोशी बीजेपी में अच्छी पकड़ रखने वाले गणेश जोशी दो बार जितकर विधानसभा पहुंच चुके हैं 2007 में वह राजपुर रोड़ से विधायक चुने गए तो 2012 में मसूरी विधानसभा से विधायक बने. राजेंद्र भंडारी कांग्रेस विधायक राजेंद्र भंडारी की बदरीनाथ विधानसभा सीट पर राजेंद्र भंडारी की मजबूत पकड़ मानी जाती है. वही 2007 और 2012 में दो बार वह बदरीनाथ विधानसभा से जिते वही मंत्री मंडल में भी हरीश रावत ने जगह दी. एकबार फिरसे वह बदरीनाथ से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. वह बड़े नेता जो दो बार हार का सामना कर चुके हैं और तीसरी बार भी उनकी स्थिती मजबूत नही है. शूरवीर सिंह सजवाण उत्तर प्रदेश के समय में कैबिनेट मंत्री रहने वाले सजवाण को एक बड़े नेता के रुप में पहचाना जाता है. पूर्व कैबिनेट मंत्री पिछले दो विधानसभा चुनाव में हार का सामना कर चुके हैं. 2007 में ऋषिकेश विधानसभा से उन्हे हार मिली तो 2012 में देवप्रयाग विधानसभा से हार का सामना करना पड़ा.वहीँ बात करें नरेन्द्रनगर से बीजेपी के प्रत्याशी सुबोध उनियाल की तो वे नरेन्द्रनगर से ही 2 चुनाव जीते व 1 चुनाव  हारे भी हैं इस बार का चुनाव उनके लिए भी अहम है क्यूंकि एक तो नई पार्टी से वे चुनाव लड़ रहे हैं और दूसरा वे पूर्व में बगावत भी कर चुकें हैं वहीँ उनके सामने बीजेपी से टिकेट न मिलने से नाराज जो अब निर्दलीय ओम गोपाल रावत व कांग्रेस के युवा प्रत्याशी हिमांशु बिजल्वाण उन्हें कड़ी  टक्कर दे रहें हैं

त्रिवेंद्र सिंह रावत बीजेपी के कदावर नेता और पूर्व कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत 2012 में रायपुर सीट से तो 2014 के उपचुनाव में डोईवाला से चुनाव हार चुके हैं. प्रकाश पंत पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंच 2012 के चुनाव में पिथौरागढ़ सीट से और उसके बाद उपचुनाव में विजय बहुगुणा से हार चुके हैं. सूर्यकांत धस्माना कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना प्रदेश की राजनीति में अच्छी पकड़ रखते हैं. वही सूर्यकांत धस्माना को भी लगातार दो बार हार का सामना करना पड़ा है. 2007 में वह लैंसडौन सीट से हार चुके हैं तो 2013 में देहरादून नगर निगम का चुनाव हार चुके हैं. अब जब इन बड़े नेताओं की शाख दाव में लगी है तो आने वाले 11 मार्च को पता भी चल जायेगा की कौन हारा कौन जिता… किसने जीत की हैट्रिक मारी तो किसने हार की.

@प्रदेश मीडिया 

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