पीपलकोटी का बंड मेला, लोक संस्कृति का अनूठा संगम

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चमोली जिले की अपनी विविध सांस्कृतिक पहचान है। इधर, पिंडरघाटी में कुमाऊं से मेल खाती लोक संस्कृति है तो उधर जोशीमठ वाले इलाके की परंपराएं इनसे काफी भिन्न हैं। यहां के मेले इन लोक कलाओं को जोड़ने का काम करते हैं। यही नहीं यह मेले पूरे पहाड़ की समृद्ध परंपराओं को भी मंच प्रदान करते हैं। ऐसा ही एक मेला है बंड मेला। अगर ये कहें की ‘बंड मेला नहीं देखा तो क्या देखा’ तो गलत नहीं होगा। सात दिवसीय मेला मंगलवार को संपन्न हो गया है।

पीपलकोटी में आयोजित सात दिवसीय बंड मेला मंगलवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हो गया है। समापन अवसर पर लोक गायिका खुशी जोशी के गीतों की शानदार प्रस्तुतियों पर दर्शक भी खूब झूमें। मेले के समापन के मुख्य अतिथि बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट कहा कि बंड मेले ने बेहद अल्प समय में पूरे प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। कहा कि बंड मेले की सबसे बड़ी खूबी यह है कि प्रदेश में आयोजित होने वाले सैकड़ों मेलों से हटकर पहाड की सांस्कृतिक विरासत को बचाने में सफल रहा है। कहा कि बंड मेला युवाओं, महिलाओं और प्रतिभाओं के लिए एक बेहतर मंच है अपनी प्रतिभा दिखाने का। इस मौके पर उन्होंने मेले में हुए प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए।

इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष शम्भू प्रसाद सती, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, महामंत्री हरिदर्शन रावत, कोषाध्यक्ष बिहारी लाल, पूर्व संरक्षक गजेंद्र राणा, भाजयुमो के दशोली मण्डल अध्यक्ष विवेक शाह, जिला सांसद प्रतिनिधि रघुवीर बिष्ट, विधायक प्रतिनिधि मोहन नेगी, चन्द्रकला तिवारी, क्षेत्र पंचायत सदस्य नौरख पीपलकोटी सुनीता शाह, ग्राम प्रधान नौरख महावीर राणा, ज्येष्ठ उपप्रमुख अयोध्या प्रसाद हटवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनील कोठियाल, सुरेन्द्र सिंह नेगी, किशन सिंह पुण्डीर, मीना बिष्ट, रूप सिंह गुसाईं, हुकम सिंह रावत, प्रदीप फरस्वाण, गुलाब सिंह, मनोज कुमार सहित कई लोग मौजूद थे। इससे पूर्व लोक गायिका खुशी जोशी और गाविंद दिगारी की जुगल बंदी ने मेले में खूब वाहवाही लुटी। खुशी जोशी ने हाय ककड़ी झील मा…, गीत की जरिये पहाड़ की याद दिलाई तो वहीं हाय तेरू रूमाल गुलाबी मुखड़ी… गीत के जरिये महिलाओं की सुंदरता औश्र शृंगार की प्रशंसा की।

ठंड में देर रात तक लोकगीतों पर झूमे लोग 

बंड मेले की अन्तिम सांस्कृतिक संध्या संस्कृति विभाग द्वारा भेजे गए दल शैलजा सामाजिक संस्था पौड़ी और श्री पूर्णागिरी देवभूमि उत्थान समिति के नाम रही। जिन्होनें अपनी प्रस्तुतियों से देर रात तक दर्शकों को ठंड में भी बैठने और झूमने को मजबूर किया। कार्यक्रम की शुरूआत पूर्णागिरी देवभूमि उत्थान समिति के गायक संजय पथनी और तारा पथनी ने नन्दा सुनन्दा पर आधारित गीत से की। वहीं दूसरी तरफ कुमाऊंनी तारा पथनी के कान मां डबल झूमका… हीरा समदीण… घास काटुला ईजा गीतों से दर्शकों को देर रात्री तक झूमने के लिए मजबूर कर दिया।

किरूली बना वालीबाल टूर्नामेंट का विजेता 

बंड विकास मेले के अंतर्गत वॉलीबाल का फाइनल मैच किरूली और बिरही के मध्य खेला गया, जिसमें किरूली ने बिरही को तीन सेटों में चले मैच में 3-0 से हराया।

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