निजी बैंकों ने भी जताई सहमति, डेबिट कार्ड से लेन-देन पर नहीं लगेगा शुल्क

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    नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कालाधन व आतंकी फंडिंग रोकने को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के बाद सरकार ग्रामीण क्षेत्रों विशेषकर किसानों को नकदी उपलब्ध कराने के साथ ही देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में जुट गयी है। सरकार की इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक भी डेबिट कार्ड से लेन-देन पर शुल्क माफ करने को तैयार हो गए हैं।

    बैंकों के इस कदम से 31 दिसंबर तक डेबिट कार्ड से लेन-देन पर कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लगेगा। वहीं राष्ट्रीय राजमार्गो पर टोल कलेक्शन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा मंे अहम कदम उठाते हुए सरकार ने सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों से कहा है कि वे नई गाडि़यों में आरएफआइडी टैग लगाएं ताकि टोल प्लाजा पर लोगों को नकदी देने के लिए रुकना न पड़े। साथ ही सरकार ने किसानों के लिए नकदी मुहैया कराने को जिला सहकारी बैंकांे को 21,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने के साथ ही उर्वरक कंपनियों से कहा है कि वे रबी फसलों की बुवाई के लिए किसानों को खाद क्रेडिट कार्ड और चैक से दें। इस बीच पेट्रोल पंप और सरकारी अस्पताल सहित कई जगहों पर पुराने नोट स्वीकारने की अंतिम सीमा गुरुवार को समाप्त हो रही है। इसे आगे बढ़ाया जाएगा कि नहीं, इस बारे मंे अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के सचिव शक्तिकांत दास ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सभी बैंक डेबिट कार्ड के माध्यम से होने वाले लेन-देन पर शुल्क न वसूलने को राजी हो गए हैं। साथ ही कुछ सेवा प्रदाता जो स्विचिंग सेवा प्रदान करते हैं वे भी 31 दिसंबर 2016 तक डेबिट कार्ड से लेन-देन पर कोई शुल्क न लेने को तैयार हो गए हैं। दास ने कहा कि रुपे डेबिट कार्ड से लेन-देन पर स्विचिंग शुल्क पहले ही माफ किया जा चुका है। देशभर में 30 करेाड़ रुपे कार्ड हैं और पिछले 12 दिनों में रुपे कार्ड से ट्रांजैक्शन में 300 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

    उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने डेबिट कार्ड से 2000 रुपये तक के लेन-देन पर अधिकतम 0.75 प्रतिशत तथा इससे अधिक राशि के लेन-देन पर एक प्रतिशत से अधिक शुल्क लगाने का प्रावधान किया था। अक्टूबर 2015 तक देशभर में 61.5 करोड़ डेबिट कार्ड उपयोगकर्ता और 2.3 करोड़ क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले हैं।

    ट्राई भी घटा चुका है शुल्क

    दास ने कहा कि गैर स्मार्ट फोन के माध्यम से वित्तीय भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ट्राई पहले ही लेन-देन पर यूएसएसडी शुल्क डेढ़ रुपये से घटाकर पचास पैसे कर चुका है। इसकी सुविधा 31 दिसंबर 2016 तक मिलती रहेगी। दास ने कहा कि देशभर मंे 65 प्रतिशत मोबाइल हेंडसेट गैर-स्मार्ट फोन हैं और इनका इस्तेमाल अधिकतर गरीब लोग करते हैं। इसलिए ट्राई के इस कदम से उन्हें वित्तीय लेन-देन करना किफायती होगा।

    जिला सहकारी बैंकों को 21,000 करोड़ रुपये

    दास ने कहा कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों खासकर किसानों को नकदी उपलब्ध कराने के इरादे से जिला सहकारी बैंकों को नाबार्ड से धनराशि की सीमा 21,000 करोड़ रुपये की है। ऐसा होने पर ग्रामीण क्षेत्रों मंे नकदी की किल्लत नहीं होगी।

    नई गाडि़यों में लगेगा आरएफआइडी

    दास ने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों को कहा है कि वे नई गाडि़यों मंे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से टोल वसूलने की व्यवस्था बनाने के लिए आरएफाआइडी लगाकर दें। ऐसा होने पर गाड़ी चालकों को न तो टोल देने के लिए रुकना पड़ेगा और न ही उन्हें नकदी देने की जरूरत पड़ेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्गो पर टोल प्लाजा पर परिवहन सुचारु रहेगा।

    दास ने कहा कि सभी सरकारी संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों को भी कहा गया है कि वे किसी भी पक्ष को भुगतान करते समय कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड और आधार पेमेंट सिस्टम के माध्यम से भुगतान का विकल्प प्रदान करें

     

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