नगर निकायों में जुड़ रहे गांवों पर नहीं लगेगा टैक्स, सीएम ने की घोषणा

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प्रदेश भर में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में शामिल नए गांवों से सरकार दस साल तक हाउस टैक्स नहीं लेगी। निकायों में स्वच्छता
के लिए दो हजार पर्यावरण मित्र भर्ती किए जाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रायपुर में एक कार्यक्रम में यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बजट सत्र में नगर निकायों के विकास के लिए 15 सौ करोड़ रुपये के बजट का प्राविधान किया है। परिसीमन के बाद नगर निकायों में शामिल नए गांवों को सरकार पूरी सुविधाएं देगी। ऐसे गांवों से दस साल तक हाउस टैक्स नहीं लिया जाएगा।

रिश्वत के तौर पर लिए गए दो करोड़ लौटाए 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। भ्रष्टाचारियों में इतनी दहशत हो  गई है कि रिश्वत के तौर पर ली गई दो करोड़ रुपये अब तक वापस दे चुके हैं और अपनी गलती मानकर माफी मांग रहे हैं।

204 गांव शामिल किए शहर में 

सरकार ने पिछले दिनों 41 निकायों में एक साथ सीमा विस्तार करते हुए कुल 204 गांवों को नगर निकायों का हिस्सा बनाया है। इसमें सर्वाधिक 70 गांव देहरादून नगर निगम में शामिल किए गए। इसके साथ ही कोटद्वार और ऋषिकेश नगर पालिकाओं में सीमा विस्तार के साथ ही इन्हें नगर निगम का भी दर्जा दिया गया।

2020 तक समाप्त हो जाएगा कुपोषण 

सीएम ने कहा कि कुपोषण की समस्या पूरे देश में है। बावजूद उत्तराखंड अच्छी स्थिति में है। हमने स्थानीय अनाजों से ऐसा पोषाहार तैयार किया है जो सर्वोत्तम माना गया है। कुपोषण के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है। दावा किया कि 2020 तक प्रदेश में कुपोषण पूरी तक खत्म हो जाएगा।

चुनाव से पहले धनवर्षा 

नगर निकाय सीमा विस्तार के बाद शहरों में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों की नाराजगी कम करने के लिए सरकार ने निकायों पर जमकर धनवर्षा की है। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण के दौरान निकायों के लिए 92 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत करने की घोषणा कर चुके हैं। इसके साथ ही 14वें वित्त आयेाग के संस्तुति के आधार पर सरकार निकायों को 58 करोड़ रुपए का बजट जारी कर चुकी है।

विपक्ष भी नहीं कर पाया बजट की आलोचना 

मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार ने समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखकर बजट पेश किया है। यह एक ऐसा बजट है, जिसकी विपक्ष भी आलोचना नहीं कर पाया। सीएम ने कहा कि घोषणाओं का कोई फायदा नहीं होता है। इसलिए मैंने विधायकों से कहा कि वह घोषणाओं के लिए दबाव न बनाएं। यदि घोषणाओं का फायदा होता तो पिछली सरकार का यह हश्र नहीं होता। पूर्व सीएम ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं कीं लेकिन बजट में सिर्फ 420 करोड़ का प्रावधान किया था।

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