देहरादून: निजी स्कूलों की मनमानी व एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं होने की शिकायतों पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त रुख किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर देहरादून में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम में दो अधिकारी अभिभावकों की शिकायतों को दर्ज करेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अन्य जिलों में भी अभिभावकों से संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिकायतें दर्ज कराने को कहा है। दरअसल, पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री के मोबाइल एप, फेसबुक पेज और ट्विटर अकाउंट पर अभिभावकों की ओर से शिकायत की जा रही थी। इनमें कुछ स्कूलों की ओर से एनसीईआरटी की किताबों के अतिरिक्त अन्य निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को अभिभावकों के साथ जबरदस्ती करने की शिकायतें हैं। कुछ दुकानदारों के एनसीईआरटी की किताबों की ओवर स्टॉकिंग करने से स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों की कमी होने की शिकायतें भी मुख्यमंत्री से की गई हैं। सरकार सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को इसी सत्र से लागू करने का आदेश दे चुकी है। गरीब विद्यार्थियों को राहत पहुंचाने को उठाए गए इस कदम के बाद इसे अमल में लाने में दिक्कतों की सबसे अधिक शिकायतें देहरादून जिले से मिल रही हैं। इस जिले में निजी स्कूलों की तादाद भी सर्वाधिक है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन शिकायतों का संज्ञान लेकर देहरादून के जिला शिक्षा अधिकारी को अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए थे। इसमें दो समर्पित कार्मिकों की तैनाती की हिदायत भी दी गई थी। उक्त निर्देशों के मुताबिक जिला शिक्षा अधिकारी ने 24 घंटे के भीतर कंट्रोल बनाकर दो अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी है। अब अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी दो मोबाइल नंबरों 9412403037 और 9412973903 एवं देहरादून जिला शिक्षा अधिकारी की ई-मेल पर संपर्क कर सकते हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि अन्य जिलों में भी अभिभावकों से संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के फोन नंबरों पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती हैं। मुख्यमंत्री की ओर से अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में लिए गए इस फैसले को अभिभावकों ने सोशल मीडिया पर सराहा है।

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ऋषिकेश: नमामि गंगे परियोजना के कार्यों में हो रही धीमी गति पर हरिद्वार सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने संबंधित अधिकारियों की जमकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वप्निल परियोजना है, इसके लिए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मंगलवार को हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने नगर निगम सभागार में नमामि गंगे स्टेट प्रोग्राम ग्रुप तथा परियोजना से संबंधित अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर योजना की कार्य प्रगति पर चर्चा की। नमामि गंगे के परियोजना निदेशक डॉ. राघव लंगर ने बताया कि उत्तराखंड में नमामि गंगे परियोजना के तहत 42 घाटों का निर्माण किया जाना है। जिनमें से बीस घाटों का काम सिंचाई विभाग ने शुरू कर दिया है। जबकि ऋषिकेश व हरिद्वार के घाटों के निर्माण व विस्तार का काम नमामि गंगे के बजाय गंगा फ्रंट डेवलपमेंट योजना के तहत किया जा रहा है। जिसके बाद सांसद निशंक ने विभागवार अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली

अधिकांश विभागों का कहना था कि अभी तक कोई भी योजना पूरी नहीं हो पाई है। विभागीय अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर सांसद का पारा चढ़ गया। उन्होंने कहा कि एक वर्ष पूर्व बजट मिल जाने के बावजूद अभी तक नाममात्र के काम धरातल पर हुए हैं। उन्होंने हिदायत देते हुए योजना के कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। सांसद डॉ. निशंक ने नमामि गंगे के परियोजना निदेशक डॉ. राघव लंगर को प्रत्येक सप्ताह नमामि गंगे परियोजना की समीक्षा करने के निर्देश दिये।

बैठक में उप जिलाधिकारी हरगिरी, सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर दिनेश चंद्र, प्रभात राज, सीवर विंग के सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर एसके रस्तोगी, डीएफओ नरेंद्रनगर राहुल, नगर पालिका अध्यक्ष मुनिकीरेती शिवमूर्ति कंडवाल, ईओ महेंद्र सिंह यादव, भाजपा के मंडल अध्यक्ष चेतन शर्मा, संजय शास्त्री, कुसुम कंडवाल, सरोज डिमरी, भगतराम कोठारी, अनीता ममगांई, इंद्र कुमार गोदवानी, रविंद्र राणा, दिनेश सती, पंकज शर्मा, दीपक भट्ट, शंभू पासवान आदि उपस्थित थे।

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