देवभूमि में अपराधी हुए बेखोफ….

0

उत्तराखंड की नयी सरकार भले ही सूबे की सूरत और सीरत बदलने का दावा करे लेकिन हालात जस के तस है , जिस बिगड़ी व्यवस्था को दुरुस्त कंरने के नाम पर वर्तमान सरकार या यूँ कन्हे की भाजपा ने जनता से वोट मांग कर सूबे की सत्ता हासिल की वो व्यवस्था ज्यूँ की त्यूं बनी है , सत्ता सँभालने के 13 दिन बाद भी राज्य की नयी सरकार यंहा सक्रीय अपराधियों व माफियाओं को घर बैठने का सन्देश नहीं दे सकी है , उल्टा पिछली एक पक्वादे में एक के बाद एक कई ऐसी घटनाये अपराधियों ने अंजाम दे दी जिससे कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गए हैं ऐसे में विपक्षी दल तो सरकार को अपनी कथनी को करनी में बदलने की चुनोती दे ही रहे हैं अपराधी भी सरकार को चुनौती देते नजर आ रहे हैं /
त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सूबे की सत्ता सँभालने के बाद राम नगर में खनन माफिया द्वारा वनकर्मी की ह्त्या किये जाने का मामला हो या फिर हरिद्वार में खुले आम व्यपारी की गोली मार कर हत्या की वारदात हो सूबे की कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं , बात यंही तक सिमित नहीं है बल्कि भाजपा के सत्तारूढ़ होने की बाद तो सूबे की सियासत में भगवा ब्रिगेड कुछ यूँ हावी हो गयी है की आये दिन किसी न किसी जिले से भगवा ब्रिगेड के तांडव की खबरे आने लगी हैं
ऐसे में सूबे की सियासत में नेपथ्य में चली गयी कांग्रेस को न सिर्फ सरकार को कटघरे में खड़ा करने का मोका मिल गया है बल्कि कांग्रेस ने इन सब मुद्दों को हथियार बना कर जनता को ये अहशास करने का मोका मिल गया है की अगले पांच साल कुछ ऐसे ही हालात से जनता को रूबरू होना पड़ेगा

दो हफ्ते के अन्दर उत्तराखंड के कुमाऊ में दो एसी घटना घटी जिससे देवभूमि उत्तराखंड ना केवल शर्मसार हुई बल्कि प्रदेश में पुलिस नाम की कोई चीज है भी या नहीं ये सवाल भी खड़े कर गयी | दो अलग अलग घटनाओं में प्रेमी जोड़ो को कुछ शरारती तत्वों ने जिस कदर बहरेमी से पीटा उससे कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं ,  खुद पुलिस विभाग के आला अधिकारी मानते हैं की हाल ही में घटी घटनाएँ उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने लगी है , लेकिन पुलिस फिर भी ये कह कर अपनी पीठ थपथपाने में लगी है कि उसने त्वरित कार्यवाही कर कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया , लेकिन पुलिस के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है की आखिर पुलिस के होते लोग कानून अपने हाथों में ले क्यों रहे हैं /

Loading...