तो क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व हो गया खत्म

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उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद क्षेत्रीय दलों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। हालात यह है कि उत्तराखंड आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाली यूकेडी चुनाव में अपना वजूद तक नहीं बचा सकी। इतना ही नहीं यूपी के अलावा उत्तराखंड में अपना भविष्य तलाश रही बसपा तो इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। आपको बता दें कि ख्007 में हुए विधानसभा चुनावों में बसपा के 8 विधायक चुन कर आए थे।

ख्00ख् में किया था दमदार प्रदर्शन

उत्तराखंड की मांग को लेकर आंदोलन लड़ने वाली यूकेडी अब अपने खुद के अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करती हुई नजर आ रही है। उत्तराखंड में फ् बार हुए विधानसभा चुनावों में ख्00ख् में ब्, ख्007 में फ्, ख्0क्ख् में क् विधायक यूकेडी का जीता और साल दर साल यूकेडी का ग्राफ गिरता गया। इसके बाद से यूकेडी के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। हाल ये है कि ख्0क्7 में यूकेडी अपना खाता तक नहीं खोल पाया है। आपको बता दें कि इससे पहले कम मतदान प्रतिशत के चलते पार्टी की मान्यता ख्0क्ख् में भी खत्म की जा चुकी है। ख्00ख् में पहले विधानसभा चुनाव में यूकेडी ने दमदार प्रदर्शन किया था। पार्टी ने म्ख् सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और ब् पर जीत दर्ज की। जिसके बाद उम्मीद जगी कि उत्तराखंड में यूकेडी तीसरे विकल्प के रूप में उभरेगा, लेकिन ख्007 में पार्टी का प्रदर्शन गिर गया। पार्टी फ् सीटों पर ही जीती। ख्0क्ख् में तो यूकेडी को सिर्फ क् सीट पर ही संतोष करना पड़ा, जो बाद में यूकेडी से अलग- थलग नजर आए। बावजूद इसके यूकेडी ने हर सरकार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बीजेपी कांग्रेस दोनों दलों को समर्थन देकर हर बार सत्ता में भागीदारी की। लेकिन, ख्0क्7 में मोदी की सूनामी यूकेडी को ले डूबा। अब पार्टी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। ये बात अलग है कि पिछली बार यूकेडी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके प्रीतम पंवार ने इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की है। लेकिन, वे अब यूकेडी से अलग हो चुके हैं।

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