डीएवी कॉलेज : मंत्री के ओएसडी समेत 10 पूर्व छात्र नेताओं को कोर्ट ने किया बरी

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परीक्षा समाप्त होने के बाद परीक्षा सेंटर में घुसकर तोड़फोड़, हंगामा करने के साथ उत्तर पुस्तिका फाड़ने के आरोप से अदालत ने डीएवी पीजी कॉलेज के दस पूर्व छात्र नेताओं को संदेह का लाभ देते हुए बरीकर दिया। बरी किए छात्र नेताओं में राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक के ओएसडी आलोक शर्मा भी शामिल हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि 29 दिसंबर 2005 को डीएवी इंटर कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य अशोक कुमार द्विवेदी ने थाना डालनवाला में डीएवी के छात्र नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। अशोक कुमार द्विवेदी की शिकायत के अनुसार घटना वाले रोज स्कूल में माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय की परीक्षा चल रही थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिका जमा करवा दी और चले गए। इसी बीच करीब 25 से 30 छात्र परीक्षा केंद्र में घुस आए और अन्दर आते ही दरवाजा व कुर्सियां तोड़ते हुए हंगामा शुरू कर दिया और कमरे में उत्तर पुस्तिकाओं को फाड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने तत्कालीन छात्र नेता पंकज क्षेत्री निवासी नेहरूग्राम, राजीव चौहान निवासी नालापानी, आलोक शर्मा निवासी अजबपुर खुर्द, अवनीश कोठारी निवासी रायपुर, संग्राम सिंह पुण्डीर निवासी वसंत विहार, अनिल बिष्ट निवासी बंजारावाला, रविंद्र रावत निवासी डोईवाला, ओम कक्कड़ निवासी ओल्ड डालनवाला, राहुल रावत निवासी बंगाली लाइब्रेरी रोड और ओमप्रकाश सती निवासी अजबपुर खुर्द के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता पृथ्वी सिंह नेगी ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किलों को मामले में झूठा फंसाया गया है। जिरह के दौरान शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने कहा कि उसने किसी भी छात्र का नाम पुलिस को नहीं बताया था। इसके अलावा घटना के समय केन्द्र में मौजूद चपरासी व बाबू के अभियोजन द्वारा बयान नहीं करवाए गए न ही फाड़ी गई उत्तर पुस्तिकाएं अदलात में प्रस्तुत की गई। इस पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपी छात्र नेताओं को गुरुवार को उक्त मामले में बरी कर दिया। बीएड कॉलेजों के निजीकरण के खिलाफ था आंदोलन देहरादून। डीएवी के छात्र नेताओं को बीएड प्रवेश परीक्षा की कॉपी फाड़ने के जिस आरोप में बरी किया गया वह आंदोलन बीएड कॉलेजों के निजीकरण के खिलाफ शुरू हुआ था। मामले में बरी हुए छात्र नेताओं में शामिल अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने बताया कि 2005 में कई निजी कॉलेजों को बीएड की अनुमति दे दी गई थी। जिसे लेकर प्रदेश व्यापारी बंद के साथ ही कई कॉलेजों में छात्रों ने आंदोलन किया था। इस दौरान लाठी चार्ज की नौबत भी आई थी। राज्य के सरकार के इस फैसले के विरोध में राज्य के कई बड़े कॉलेज भी एक हफ्ते से अधिक समय तक बंद रहे थे।

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