चुनाव परिणाम आने के बाद विभिन्न संगठनों ने दी फिर से आंदोलन की चेतावनी

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कांग्रेस सरकार द्वारा मांगों पर गोलमोल जवाब देने से नाराज चल रहे थे संगठन

इस माह में शुरू हो सकता है आंदोलनों का सिलसिला

देहरादून, सुमित थपलियाल। विगत कई सालों से विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत संगठनों ने एक बार फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। चुनाव का रिजल्ट की देरी का इंतजार कर रहे संगठनों की माने तो इस बार सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। वहीं पिछली सरकार यानि कांग्रेस द्वारा आंदोलनरत संगठनों को गोलमोल जवाब देने व कार्रवाई में लेटतलीफी से भी संगठन कांग्रेस के खिलाफ आक्रोशित थे। अब नई सरकार भाजपा के सामने इन तमाम संगठनों का सामना करने की चुनौती रहेगी। क्योंकि इससे पहले इन संगठनों को सिर्फ कोरे आश्वासन दिया गया। लिहाजा अब आंदोलनरत संगठन भी सरकार से जहां मांग पूरी करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं वहीं भाजपा के लिए भी यह बड़ी चुनौतीपूर्ण  कार्य रहेगा कि आंदोलनरत संगठनों की मांगों को कैसे और कब तक पूरा करेगी।

शीघ्र परेड ग्राउंड में दिखेंगे संगठन

नई सरकार बनने के साथ ही आंदोलरत संगठन अब परेड ग्राउंड स्थित धरनास्थल पर दिखेंगे। संगठनों ने पूर्व में इसकी चेतावनी दी थी। गौरतलब है कि चुनाव से पहले कई संगठन अपनी- अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे थे। सरकार पर ढुलमुल रवैया का आरोप लगाते हुए संगठनों ने नई सरकार बनने के बाद एक बार फिर से आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसी माह से संगठनों के आंदोलन का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

शिक्षा मंत्री पर बढ़ेगा दवाब

नई सरकार बनते ही शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी भले ही किसी को भी मिले, लेकिन इतना जरूर है कि इस बार शिक्षा मंत्री पर विभिन्न संगठनों की मांग पूरा करने का दवाब अधिक रहेगा। क्योंकि अधिकांश आंदोलनरत संगठन शिक्षा विभाग से जुड़े हुए हैं। इसका यह भी कारण है कि पूर्व में शिक्षा मंत्री द्वारा संगठनों को दिए कोरे आश्वासन के बाद ये सभी संगठन नई सरकार व मंत्री से मांग पूरी की आस लगा रहे हैं। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री पर खासी जिम्मेदारी रहेगी।

पूर्व सरकार से संतुष्ट नहीं संगठन

मांगों पर कार्रवाई व उन्हें पूरा करने के लिहाज से देखें तो विभिन्न आंदोलनरत संगठन कांग्रेस सरकार से संतुष्ट नहीं थे। इस दौरान सचिवालय व सीएम आवास कूच के दौरान भी कई बार संगठनों पर लाठीचार्ज हुआ। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा शासन व प्रशासन से हुई वार्ता भी सफल नहीं हुई। कई संगठन पिछले चार साल से मांगों को लेकर धरने पर डटे रहे।

-बयान

पूर्ववर्ती सरकार द्वारा मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेने से संगठन में रोष व्याप्त है। अब नई सरकार बनने के बाद संगठन से जुड़े प्रदेशभर के योग प्रशिक्षितों को

मांग पूरी होने की आस दिख रही है। इसी माह से एक बार फिर आंदोलन शुरू कर मांगों को सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

———- राकेश सेमवाल प्रदेश अध्यक्ष प्रशिक्षित योग बेरोजगार महासंघ

शिक्षा मित्र में समायोजन को लेकर पिछले चार सालों से आंदोलन किया जा रहा है। इस दौरान कई बार मंत्रियों व विभागीय अधिकारियों से वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अब नई सरकार बनने से उम्मीद जाग रही है। शीघ्र ही वार्ता कर सरकार के सामने समस्या को रखा जाएगा। —- देवेन्द्र बिष्ट प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष शिक्षा आचार्य संगठन

लम्बे समय से आंदोलनरत रहने के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। मांग पूरी कब होगी इस बारे में अब तक कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया। इस सरकार से उम्मीद जताई जा रही है कि मांग पर ठोस अमल कर कोई सकारात्मक रास्ता ढूंढ़ेगी। ——————-देवेन्द्र सिंह, प्रशिक्षित बीपीएड

 

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