चुनावी अखाड़ा: कांग्रेस संगठन नहीं हरीश रावत का कैम्पेन

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उत्तराखंड में चुनाव आचार संहिता लगने के बाद सभी राजनीतिक दल पूरी तरह से अपनी चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाने में जुट गए हैं। सत्ता में वापसी को लेकर कांगे्रस संगठन किसी तरह से कोई समझौता नहीं करना चाहता तो वहीं सीएम हरीश रावत खुद ही अकेले प्रचार की कमान सम्भाल रहे हैं। सीएम रावत के कई प्रचार वाहन तैयार हैं, लेकिन इन वाहनों में उत्तराखंड कांग्रेस संगठन को गायब कर दिया गया है।दिल्ली में कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में प्रत्याशियों के चयन को लेकर खूब चर्चा हुई। कांग्रेस संगठन का दावा है कि 63 प्रत्याशियों के नाम को फाइनल भी कर लिया गया है। कांग्रेस जल्द ही सभी 70 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करेगी। चुनाव की तारीखों के एलान के बाद उत्तराखंड में अब सत्ता की जंग जोर पकड़ने लगी है। सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस इस इम्तिहान में खुद को पूरे अंको से साथ पास कराने की कवायद में जुटी है। ताकि कांग्रेस को हर हाल में सत्ता हासिल हो सके। लेकिर इस बीच कांग्रेस के चार प्रचार वाहनों में प्रदेश अध्यक्ष समेत संगठन को दरकिनार करने से सरकार और संगठन के बीच बनी रार अभी भी बरकरार रहने के संकेत साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। ये चारों प्रचार वाहन कांग्रेस भवन में आए तो इन्हें देखकर संगठन से जुड़े नेता भी  आश्चर्यचकित रह गए कि इसमें न तो प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय हैं और न ही संगठन का कोई पदाधिकारी है। हालांकि प्रचार वाहन में नारा-‘मैं नही ंहम’ लिखा गया है। प्रचार वाहनों में सोनिया गांधी और राहुल के अलावा सिर्फ हरीश रावत की तस्वीर है। इन प्रचार वाहनों में सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने का खाका तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत कांग्रेस संगठन से अलग प्रचार की कमान सम्भालने की मुहिम में जुट रहे हैं। सीएम रावत ने साफ किया है कि वे किसी युवा से कम नहीं हैं और प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर अकेले प्रचार करने के लिए मुस्तैद हैं। सीएम रावत ने कहा है कि वे अब एक मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि कांग्रेस के प्रचारक के तौर पर जनता के बीच जा रहा हूं। कांग्रेस मुख्यालय में मुख्यमंत्री के प्रचार वाहनों में उत्तराखंड कांग्रेस संगठन के गायब होने से कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। एक ओर कांगे्रस में एकता की बात कही जा रही है और चुनावी महासमर में पूरी मुस्तैदी के साथ एकजुट होकर उतरने की तैयारी में कांग्रेस जुट भी रही है। लेकिन मुख्यमंत्री के इन प्रचार वाहनों में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का नाम न होने से संगठन में कुछ नाराजगी जरूर है। हालांकि कांग्रेस संगठन का कोई पदाधिकारी इसको लेकर साफ तौर पर अपनी नाराजगी को जाहिर नहीं कर रहा है। लेकिन इतना जरूर है कि संगठन और सरकार के बीच अभी भी मतभेद की स्थित बनी है। आपको बता दें कि कांग्रेस मुख्यालय में जिन प्रचार वाहनों को रखा गया है उनमें प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का बखान किया गया है। संगठन और सरकार के बीच तकरार कोई नहीं है पीडीएफ को लेकर शुरू हुई रार के बाद किशोर उपाध्याय ने एक परिवार से एक टिकट का सवाल खड़ा कर दिया। उसके बाद जुम्मे की नमाज पर अल्पालिक छुट्टी के मामले में जब हरीश रावत विपक्ष के निशाने पर थे, सरकार का साथ देने के बजाय किशोर उपाध्याय ने इस छुट्टी के औचित्य पर ही सवाल उठा दिया। ये सभी मामले अभी बरकरार हैं। इसलिए संगठन तथा सरकार के बीच रार भी बरकरार है। प्रचार वाहन इसका उदाहरण है। हालांकि किशोर इस तकरार पर पर्दा डाल कर इसे आगे नहीं बढ़ने देना चाहते हैं। कांग्रेस संगठन और सरकार के बीच की तल्खी किसी से छिपी नहीं है। कई बार संगठन और सरकार के बीच आपसी मतभेद खुलकर सड़कों पर भी आ चुकी है। चुनाव प्रचार वाहनों में जिस तरह से कांगे्रस संगठन को दरकिनार किया गया है उससे ये सवाल उठना लाजिमी है।

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