खूबसूरत दयारा बुग्याल में ही कू़ड़ा जला फैलाया प्रदूषण

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उत्तरकाशी: समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल (मखमली घास का मैदान) को एक सप्ताह पूर्व आयोजित अंढूड़ी उत्सव (बटर फेस्टिवल) में पहुंचे पर्यटक बुरी तरह जख्मी कर गए। इस दौरान बुग्याली क्षेत्र में बिखरे कूड़े को उत्तरकाशी लाने के बजाय आयोजकों ने वहीं आग के हवाले कर दिया। इस कूड़े में भारी मात्रा प्लास्टिक कचरे की थी।

इस मामले में आयोजन समिति के अध्यक्ष का कहना है कि कूड़े के तीन कट्टे दयारा बुग्याल से उत्तरकाशी लाए गए हैं। बुग्याली क्षेत्र में जो कूड़ा जलाया गया, उससे आयोजकों का कोई लेना-देना नहीं है। इसे रोकने की जिम्मेदारी वन विभाग और पर्यटन विभाग की है।

दयारा बुग्याल में 17 अगस्त को अंढूड़ी उत्सव का आयोजन किया गया था। इसमें तीन हजार से अधिक ग्रामीणों व पर्यटकों ने भाग लिया। उत्सव में शामिल होने के लिए पर्यटक 16 अगस्त को ही दयारा बुग्याल पहुंच गए थे। लेकिन, उनके लिए न तो बुग्याल में शौचालय की व्यवस्था की गई थी और न कूड़ेदान की ही।

नतीजा, पर्यटकों और ग्रामीणों ने जहां-तहां कूड़ा बिखेर दिया। इसमें पानी की खाली बोतल, बिस्कुट, चिप्स, नमकीन के पैकेट सहित प्लास्टिक का कचरा शामिल है। लेकिन, कुछ लोगों ने इस कूड़े को वहीं एकत्र कर आग के हवाले कर दिया। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित हुआ।

नियमानुसार आयोजकों की ओर से बुग्याली क्षेत्र में कूड़ेदान की व्यवस्था की जानी थी और इसे एकत्र कर उत्तरकाशी पहुंचाना था। दयारा पर्यटन उत्सव समिति रैथल के अध्यक्ष मनोज राणा ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर से प्रयास किया कि बुग्याल में कूड़े का एक भी तिनका न छूटे।

कूड़े को जलाने से रोकने का जिम्मा वन विभाग का था। वहीं, उत्तरकाशी वन प्रभाग के डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि आयोजन समिति को पूर्व में ही निर्देश दे दिए गए थे कि बुग्याली क्षेत्र को साफ-सुथरा रखा जाए। हालांकि, बुग्याली क्षेत्र में प्लास्टिक का कूड़ा जलाए जाने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है, बावजूद इसके मामले की जांच की जाएगी। आगे से इसमें में कड़ी निगरानी रखने के भी निर्देश दिए जाएंगे।

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