कल मैं बहुत रोई थी पूरी रात नहीं सोई थी

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sad-girl-faceकल मैं बहुत रोई थी पूरी रात नहीं सोई थी चारों और नोटों का ही शोर है , महिलाओं पर भी खूब व्यंग्य किये जा रहे हैं, किन्तु एक नारी के मन की पीड़ा से किसी को कोई लेना देना नही है | इसलिए एक नारी मन की पीड़ा उसी की ज़ुबानी —– कल मैं बहुत रोई थी पूरी रात नहीं सोई थी एक एक नोट बड़ी मुश्किल से सम्भाला था हर एक नोट के साथ रिश्ता बनाया था हज़ार रुपए मेरे भाई ने राखी पर दिए थे ग्यारह सौ रुपये वो दिवाली पर भी लाया था हज़ार रुपये माँ ने मिठाई के भी भिजवाए थे पाँच सौ रुपये भाभी ने भी दे मान बढाये थे हर नोट से यादें थी जुड़ी मेरी हर नोट बड़ी मुश्किल से बचाया था कभी राशन से तो कभी फल सब्ज़ी से चुराया था कभी महँगे कपड़े ना पहन दिल को सादे में लुभाया था कभी बेटी की शादी में लगाने को बचाया था 50से 100, 100 से 500, 500से 1000 फिर बनाया था हर एक नोट के साथ अपने बच्चों का भविष्य बनाया था मैं ये नहीं कहती मेरे पति की कमाई मेरी नही होती पर अपनी कमाई जैसी कोई धनराशि नहीं होती वो मेरी ख़ुद की कमाई थी वो कोई काला धन नहीं था हर नोट को मैने ख़ूब खंगाला था कोई भी नोट काला नही था हर नोट हरा या लाल था जिसे मैंने तन मन धन से बचाया था जिसे मैंने 15 सालों में बनाया था मोदी जी ने उसे 15 सैकेंड में निकलवाया था |

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लेखक:मोर सिंह कठैत

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