उत्तराखंड में नयी सरकार चाहे किसी भी पार्टी की बने दबाव जरुर रहेगा

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देहरादून: फोटोरू स्ट्राइक सरकार पर दवाब बनाने के लिए विभिन्न संगठन होंगे, ये विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर थे चुनाव से कुछ समय पहले खाली किया गया धरनास्थल अब दोबारा धरने पर बैठकर सरकार को चेताने की कोशिश करेंगे.

चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं और नतीजे भी तकरीबन दो सप्ताह बाद सामने आ जाएंगे। सरकार जिस भी पार्टी की बनेगी उस पर दवाब जरूर रहेगा। दवाब बेरोजगार संगठन की मांग पूरा करने का रहेगा। इन दिनों खाली पड़ा धरनास्थल 11 मार्च के बाद विभिन्न संगठनों से भर जाएगा। पूर्व में धरना दे रहे विभिन्न संगठन सरकार को घेरने की कोशिश में एक हो गए हैं। सरकार किसी की भी बनेे, लेकिन संगठन 11 मार्च के बाद परेड ग्राउंड में एकत्र हो जाएंगे। विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की माने तो कई सालों से चले आ रहे आंदोलन पर पूर्व में सरकार ने कोई भी कार्रवाई नहीं की और गोलमोल तरीके से जवाब देते हुए उन्हें अधर में लटका दिया। लेकिन अब सरकार जिस भी पार्टी की बनेगी उसके समक्ष संगठन मांगों को शीघ्र पूरे किए जाने की बात करेगा। ये संगठन हैं आदोलनरत वैसे तो तमाम संगठन अपनी- अपनी मांगों को लेकर चुनाव से पहले तक आंदोलरनत थे। अकेले परेड ग्राउंड धरनास्थल पर लगातार बैठने वाले संगठनों की बात की जाए तो सबसे अधिक शिक्षा आचार्य धरने पर डटे रहे। चार साल से अधिक समय से शिक्षा मित्र में समायोजन की मांग को लेकर संगठन धरना पर डटा रहा, लेकिन कुछ भी सकारात्मक निर्णय नहीं निकला। इसके अलावा फार्मासिस्ट ऐलोपैथिक संगठन, प्रशिक्षित योग बेरोजगार महासंघ, अतिथि शिक्षक संगठन, एलटी प्रशिक्षित महासंघ, उपनल कर्मचारी महासंघ, एमपीडब्ल्यू संगठन, बीएड टीईटी प्रशिक्षित संगठन, बीएड एमपीएड बेरोजगार संगठन भी कई सालों से अपनी- अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, हालांकि चुनाव से ऐन पहले आचार संहिता लगने के दौरान इन संगठनों ने धरनास्थल खाली कर दिया था, लेकिन अब सभी संगठन सरकार की घोषणा होते ही धरनास्थल पर अपने- अपने बैनर तले नजर आएंगे। भाजपा से मांग करेंगे, कांग्रेस को वादा की याद दिलाएंगे कई सालों से विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत संगठन के पदाधिकारियों की माने तो इस बार चुनाव के नतीजे कुछ भी हो सरकार से मांग पूरी किए जाने की बात की जाएगी। यदि सरकार भाजपा बनाती है तो शीघ्र मांगों पर अमल लाने व कार्रवाई की मांग करेंगे। कांग्रेस सरकार बनाती है तो पूर्व में विभिन्न संगठनो से किए वादों को पूरा करने का दवाब कांग्रेस पर रहेगा। क्योंकि पूर्व में जिस तरह से सरकार ने बेरोजगार संगठनों को सिर्फ आश्वासन दिया उससे संगठन के भीतर काफी रोष था। अब देखना होगा कि भाजपा सत्ता में आती है तो धरने पर बैठे संगठनों को कांग्रेस सरकार की भांति भाजपा आश्वासन देगी या मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करेगी। वहीं कांग्रेस यदि सरकार बनाती है तो इस बार बेरोजगारों की मांगों को कितना जल्दी पूरा करेगी। क्षेत्रीय दल हमेशा साथ क्षेत्रीय दल उक्रांद की की माने तो पूर्व से ही बेरोजगारों के हित में खड़ा रहा है। इस बार सरकार बनते ही बेरोजगार की मांगों को पूरा करने का समर्थन दल द्वारा किया जाएगा। दल के प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि प्रदेश के बेरोजगारों की तरफ सरकार की अनदेखी से ही उन्हें धरने व आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ता है। सरकार यदि समय से पहले उनकी मांगों को पूरा करती है तो उन्हें सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अक्सर ऐसा होता नहीं है। दल बेरोजगार संगठनों के साथ है। बयान श्शुरू से ही मांग को लेकर सरकार से वार्ता करते रहे, लेकिन कोई भी वार्ता सफल नहीं रही। सिर्फ आश्वासन दिया गया। अब जिस भी पार्टी की सरकार बनेगी उसके समक्ष मांग रखी जाएगी व शीघ्र उस पर कार्रवाई किए जाने को भी कहेंगे।यह कहना है राकेश सेमवाल, अध्यक्ष प्रशिक्षित योग बेरोजगार महासंघ सालों से धरना दिया जा रहा है, आर्थिक स्थिति दयनीय हो चुकी है। सरकार व सम्बंधित विभागीय अधिकारी ठोस कार्रवाई करने से बचते हैं। इस बार आस लगा रहे हैं कि सरकार बनते ही मांग पूरी होगी- वीरेन्द्र प्रसाद गैरोला, प्रदेश अध्यक्ष एलटी प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन श्चार साल से धरना दिया जा रहा है। संगठन के हित में कुछ भी जवाब नहीं मिलता। वार्ता करते व चक्कर काटते थक चुके हैं। अब नई सरकार की घोषणा के बाद हम फिर से धरनास्थल पर एकत्रित होंगे। – देवेन्द्र सिंह बिष्ट, प्रदेश अध्यक्ष शिक्षा आचार्य संगठन ये सभी संगठन अब एक हो गये है जो नयी सरकार को मांगे मनवाने को मजबूर कर सकते हैं |

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