उत्तराखंड में अब मोहल्ले की परचून की दुकान से खरीद सकेंगे अंग्रेजी शराब

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देहरादून। केवल दो मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में शराब पूरी तरह छाई रही। सरकार ने कुछ दिनों पहले जारी अपनी आबकारी नीति में कुछ बदलाव किए हैं। बीस किमी के दायरे में एक व्यक्ति या फर्म को चार दुकानें आवंटित करने के पहले लिए गए निर्णय को वापस लिया गया है। लेकिन कैबिनेट बैठक में सबसे अधिक चर्चा मोहल्ले की परचून की दुकान में अंग्रेजी शराब की उपलब्धता ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया है।

अब तक अंग्रेजी शराब अनुज्ञापित दुकान या फिर ठेके पर ही मिलती रही है। अब सरकार ने शराब की उपलब्धता को मोहल्ले की परचून की दुकान तक पहुंचा दिया है। कई लोग इसे ’जनोपयोगी’ शराब नीति तक कहने लगे हैं। इसमें शर्त इतनी भर रखी गई है कि परचून की दुकान का साल भर का टर्नओवर कम से कम पांच लाख रुपये होना चाहिए और वह पांच लाख रुपये लाइसेंस फीस जमा कर सके।

गत वर्ष शराब को जनता से दूर रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय दिया था, जिसमें शराब की दुकानों को हाईवे से दूर रखने का तर्क दिया गया था। इसकी काट के रूप में सरकार ने नगर निकायों की सीमा में हाईवे को नए सिरे से अधिसूचित कर जिला मार्ग घोषित कर दिया था। उसके बाद प्रदेश की भाजपा सरकार ने दुकान खोलने की सीमा निर्धारित कर रात में शराब की दुकानें न खोलने का निर्णय लिया, जिस निर्णय पर सरकार अधिक समय तक नहीं टिक पाई। एक बार फिर से राज्य सरकार की आबकारी नीति पर चर्चा होने लगी, जब पिछले दिनों घोषित आबकारी नीति में बीस किमी के दायरे में एक व्यक्ति या फर्म को चार लाइसेंस देने को मंजूरी दी गई। इस बार की कैबिनेट बैठक में सरकार ने इस नीति को पलट दिया, इसका कारण जनता के बीच उठे विवाद को बताया गया।

कैबिनेट की इस बैठक में गु्रप में आवंटन रद्द करना और परचून की दुकान में शराब बेचने की अनुमति देने पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। लोग इसे शराब को जनता के और करीब पहुंचाने वाली आबकारी नीति बता रहे हैं। चर्चा और विवाद तो इसमें भी होना तय है, क्योंकि इस नीति के दूरगामी परिणाम आने वाले हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार विवाद उठने पर इस नीति को भी वापस ले लेगी? जो भी हो शराब के शौकीनों के लिए यह एक अच्छी खबर है, अब उन्हें शराब के ठेकों तक जाकर अपना वक्त जाया नहीं करना पड़ेगा, अपने मोहल्ले की दुकान में ही बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखे की तरह शराब भी मिलने लगेगी। यह बात अलग है कि महिलाओं के लिए अब मोहल्ले की दुमान तक जाना भी सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्हें शराबियों की तन को भेदने वाली तीखी नजरों से गुजरना पड़ेगा, अश्लील फब्तियां सुनने को मजबूर होना पड़ेगा। हो सकता है शराबियों की छेड़खानी भी झेलनी पड़े।

कैबिनेट की बैठक में बार लाइसेंस नीति में भी संशोधन किया गया है। बार लाइसेंस एक साल की बजाय तीन साल तक के लिए दिया जाएगा। बीस कमरों तक के होटलों का बार लाइसेंस की फीस पांच लाख से घटाकर तीन लाख रुपये कर दी गई है।

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