उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शिक्षा का बाजारीकरण

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शिक्षा का बाजारीकरण
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित राज्य के कई शहर अब शिक्षा के हब कम और शिक्षा के बाजार ज्यादा लगने लगे है / राज्य बनने से पहले जहाँ इन शहरों को शिक्षा के लिए जाना जाता था –वहीँ अब इन  शहरों को शिक्षा के व्यवसाय के लिए उपुक्त जगह मानने लगे है ;
उत्तराखंड आदिकाल से ही शिक्षा के लिए जाना जाता रहा है — लेकिन बदलते दौर के साथ अब उत्तराखंड शिक्षा के व्यवसाय के लिए उपुक्त जगह मानी जाने लगा है — और यही कारण है कि आज राज्य के कई शहर शिक्षा के बाजारीकरण की चपेट में है — जहाँ पर शिक्षा का धंधा खूब फल-फूल रहा है /  राजधानी देहरादून भी इसी बाजारीकरण की गिरफ्त में आया है — जिसके चलते शहर के हर गली चौराहे पर आपको अनेको ऐसे शिक्षण संस्थान मिल जायेंगे — जो छात्रों को बेहतर रिजल्ट का लालच देते नजर आ रहे है / शिक्षा के होते इस बाजारीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान आम छात्रों का हो रहा है — जो शिक्षा के लिए मोटी मोटी फीस नहीं दे पाते है /
वहीँ छात्र नेता राकेश नेगी, का कहना हे कि
शिक्षा के बाजारीकरण को लेकर शिक्षाविदों की माने जब से उद्योगपतियों द्वारा मुनाफे के लिए शिक्षा के क्षेत्र में इन्वेस्मेंट किया गया है तब से शिक्षा मंहगी हुई है — जिससे आम छात्रों का शिक्षा से महरूम होना पड़ रहा है / साथ ही कुछ शिक्षाविदों ने कहा की शिक्षा का यह बाजारीकरण तभी रुक सकता है — जब शिक्षा को पैसे की जगह ज्ञान के लिए देखा जाये बढ़ते शिक्षा के बाजारीकरण से जहाँ प्रदेश में क्वालिटी एजुकेशन घटी है –वहीँ धन आभाव से कई छात्रों को भी शिक्षा से मरहूम होना पड़ा है / इसलिए अब समाज को इस दिशा में जागरूक होने की जरुरत है — जिससे शिक्षा के इस बाजारीकरण के दानव को रोक जा सके /

प्रदेश मीडिया के  लिए देहरादून से सुभाष गौड़ की रिपोर्ट

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