अब पुराने सांसद और विधायकों के पेंशन पर लगी तलवार

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भारत 1 महान देश है इसमें कोई दोहराई नहीं. क्यूंकि यहाँ जो 1 बार विधायक या सांसद बन जाता है उसकी उम्र भर की पेंशन लग जाती है, इस से बड़ी महानता की बात और कोई देश क्या कर सकेगा, अब तो सोचने पर मजबूर हो गया हूँ की पढाई की जाए या फिर विधायक बनने की तैयारी, किसी भी कर्मचारी को पेंशन या वेतन का भुगतान किया तो जनता या कर दाता से ही है. किन्तु जब कोई 1 बार विधायक या सांसद बन जाए और उसकी उम्र भर पेंशन लग जाए तो उस कर दाता का बोझ कितना बड जाता होगा.

काफी समय बात सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कुछ बोला है, up के 1 NGO ‘लोक प्रहरी’ की याचिका पर सुप्रीम ने इस मामले पर केन्र्द सरकार, चुनाव आयोग, लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को NOTIC दिया है और जबाब माँगा है, इस पर सुनवाई अब चार हप्ते बाद होगी.

हमारे संबिधान में इस प्रकार का कोई भी नियम नहीं है की कोई भी यदि सिर्फ 1 दिन के लिए सांसद बन जाता है तो उसको आजीवन पेंशन दी जाए, और यही नहीं यहाँ तो उनको ट्रेन में भी सफ़र फ्री है वो भी 1 साथी के साथ फ्री, साथ में पत्नी को भी पेंशन मिलती है.

जबकि देखा जाए तो येसी सुभिधायें तो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को भी नहीं दी जाती, यहाँ तक की राज्य के राज्यपाल को भी आजीवन पेंशन नहीं दी जाती, क्या इस व्यवस्था का सीधा साधा असर आम आदमी पर नहीं पड़ता, क्यूँ नहीं पड़ता असली कर का भुगतान तो वही कर रहा है.

भारत के संविधान में हर चीजों को अच्छे से समझाया है किन्तु नेता की कोई क्वालिफिकेशन या नेता के लिए कोई एग्जाम या फिर नेता के लिए कोई GRADE pay येसी कोई जानकारी नहीं दी हुई है इसलिए नेता जी जब जिस हिसाब से चाहें उस हिसाब से अपने रूल बना देतें हैं.

 

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