अनाथ का सहारा नहीं बन पाई उत्तराखण्ड सरकार देखिये ये खास रिपोर्ट

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कहते हैं जब भगवान दुख देता है तो किसी को कम तो किसी को बहुत ज्यादा दे देता है…..

-वहीं जब दुख किसी ऐसे बच्चे के जिवन में हो जिसने अभी ठिक से दुनियां देखी भी ना हो. तो सोचना और समझना कठिन हो जाता है. वही एक ऐसा ही युवक जो  दुनियां और अपनी तकदिर से लड़ रहा है.. इन आंखो में एक आस है. एक उम्मीद है. ये देश का युवा है. जो देश के लिए कुछ करना चाहता है. ये है अकक्षद जो सिर्फ 20 वर्ष का है लेकिन इऩबीस सालों में उसने वो सबकुछ देख लिया जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है.
अकक्षद ने बचपन से लेकर अभी तक सिर्फ दुख देखे हैं. सिर्फ दो वर्ष की उम्र में मां बाप का साया सर से उठ गया. अपना कोई नही था जिसके सहारे दो साल का बच्चा रह सकता.दादा दादी ने अपने पोते को अपनाने से इनकार कर दिया. जिसके बाद नानी अपने नाती को घर ले लाई पाला पोसा और अच्छे स्कूल में पढ़ाया कोशिश की की उसे वो सब खुशी मिले जो उसके मां बाप देते. लेकिन कहते हैं ना जब किसी की किस्मत रुठी होती है तो उसे खुशियां सिर्फ तिनको में मिलती हैं. और इसके साथ भी वही हुआ. जब अक्क्षद ने अपनी स्कूल की पढ़ाई खत्म की और सोचा की नानी का सहारा बनुंगा तभी उसके जिवन में एक और बड़ा दुख आ गया.

-अक्षत को पता चला की उसकी दोनों किडनियां खराब है. एक युवा जो कि अपनी युवाअवस्था में कदम रख रहा हो. जिसने कई सारे सपने देखें हो. जो आंसमाछूने की बात करता हो वो अब दूसरों के सहारे का मोहताज हो चुका था. वो अपनी ही सोच में डुब चुका था और अपनी किस्मत को कोश रहा था. कभी इस स्कूल में पढ़ने वाला अकक्षद अपने दोस्तों के साथ खेलना कुदता था वो आज ठिक से चल भी नही पा रहा है.  वो सोच रहा है की क्या कंरु कैसे आगे बढू अक्षत को किसी ने बताया था की आप सरकार से सहायता मांगे और लोगों की मदद से उसने सरकार से आर्थिक सहायता मांगी, सहायता के रुप में सरकार की तरफ से मिले सिर्फ 20 हजार रुपये. जिसके बाद कई सारे सवाल प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री हरीश रावत से पूछे जाने लाजमी हैं. की क्या एक ऐसे व्यक्ति जिसकी दोनो किड़नी खराब है उसका पूरा इलाज सिर्फ 20 हजार रुपये में हो सकता है. सरकार हमेशा कहती नजर आती है की युवा ही सबकुछ है और आपका एक युवा मर रहा है इसपे आप ध्यान नही दे रहे. वही अकक्षद की मामी जिन्होने अकक्षद को दो साल की उर्म से अपने पास रखा और उसे पाला पोसा वो भी अब परेशान हैं की आखिर कैसे अकक्षद का इलाज करायें. वही जब अकक्षद ने किडनी ट्रास्पैॆरेंट करना की सोची और चढ़िगढ़ पीजीआई जाने का तय किया तो पता चला की वहां खर्च होने वाली रकम को उसके
लिए अदा करना मुश्किल ही नही नामुमकिन है. अरक्षद करा इलाज करने वाले डाक्टर एमके वोरहा ने बताया की इस इलाज में कम से कम खर्च भी तीन से चार लाख तक का है. जिसे अकक्षद के लिए अदा कर पाना नामुमकिन है.सरकार से आर्थिक मद्द की उम्मीद लगाये बैठे अकक्षद की ना जाने कब सरकार और मुख्यमंत्री हरीश रावत सुनेंगे. अगर सरकार की तरफ से अकक्षद को कोई आर्थिक सहायाता नही मिलती तो एक युवा आर्थिक अभाव से मर जायेगा. वो जिसके कई सारे सपने थे वो खत्म हो जायेंगे.|

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